बुद्धि एक ऐसी चीज जो बाजार में नही बिकती। अगर ऐसा संभव होता तो देश में बुद्धिमान व्यक्तियों और अमीरों सूची एक जैसी होती। शास्त्रों में ज्ञानियों की पहचान ज्यादा मुश्किल नहीं है, जो भी व्यक्ति इन लक्ष्णों को धारण करता है वही असल मायने में ज्ञानी होता है।
शुभ कर्म, भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास ,यज्ञ, दान, जनकल्याण आदि ये सब ज्ञानीयों के शुभ लक्षण माने गए।
महाभारत ग्रंथ में उन व्यक्तियों को बुद्धिमान माना जो व्यक्ति क्रोध,अंहकार दुष्कर्म, स्वार्थ, उद्दंडता इत्यादि दुर्गुणों की ओर आकर्षित नहीं होते।
जो व्यक्ति समय, परिस्थितियों को देखकर विचलित नहीं होता और केवल अपने कर्मों की ओर ध्यान देता है, शास्त्रों में ऐसे ही व्यक्ति को सच्चा ज्ञानी माना गया है।
ज्ञानी लोग किसी भी विषय को जल्दी इसलिए समझ लेते है क्योकि ज्ञानी व्यक्ति किसी भी बात को धैर्यपूर्वक सुनते हैं। अपने कार्य को कर्तव्य समझकर करने वाला व्यक्ति ही सही मायनों में ज्ञानी होता है।