Vaishakh Amavasya Puja Mantra: हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन को खास महत्व दिया गया है। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, पितरों का तर्पण और पिंडदान करना शुभ फलदायक माना जाता है। अमावस्या पर भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी, सूर्य देव, चंद्रमा और पितृ देवताओं की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विशेष मंत्रों के जाप से जीवन में पुण्य और सुख-शांति का आगमन होता है।
Vaishakh Amavasya 2025: वैशाख अमावस्या के दिन करें इन मंत्रों का जाप, सुख-समृद्धि का होगा आगमन
अमावस्या पर भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी, सूर्य देव, चंद्रमा और पितृ देवताओं की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विशेष मंत्रों के जाप से जीवन में पुण्य और सुख-शांति का आगमन होता है।
कब मनाई जाएगी वैशाख अमावस्या?
पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 27 अप्रैल को सुबह 4:49 बजे होगी और इसका समापन 28 अप्रैल को रात 1:00 बजे होगा। ऐसे में पूजा-अर्चना और तर्पण के शुभ कार्य 27 अप्रैल को किए जाएंगे।
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वैशाख अमावस्या मुहूर्त 2025
ब्रह्म मुहूर्त: 27 अप्रैल, प्रातः: 04:17 से प्रात:05:00 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग:27 अप्रैल, प्रातः:05:44 से 28 अप्रैल देर रात्रि 12:38 तक
- ॐ पितृ देवतायै नम:
- ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्।
- ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:
- ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।
- ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्।
- गोत्रे अस्मतपिता (पितरों का नाम) शर्मा वसुरूपत् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः।
- गोत्रे अस्मतपिता (पिता का नाम) शर्मा वसुरूपत् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः।
- गोत्रे मां (माता का नाम) देवी वसुरूपास्त् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जल वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः”
वैशाख अमावस्या का महत्व
अमावस्या के दिन पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। साथ ही पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र आदि दान करने से जीवन में धन और सौभाग्य बढ़ता है।
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