करवा चौथ का पर्व देश भर में 17 अक्टूबर को बड़े ही धूम धाम से मनाया जाएगा। महिलाएं इस व्रत में दिन भर निराहार रहकर शाम को करवा माता की पूजा करती हैं। इस व्रत में विशेष रूप से करवा माता की पूजा का विधान है। परंतु धार्मिक शास्त्रों के अनुसार करवा माता की पूजा से पहले अगर इन देव की पूजा नहीं की तो पूजा का फल नहीं मिलता है। आइए जानते है कौन है वो देव और कैसे करें उनकी पूजा अर्चना।
karwa chauth 2019: करवा माता की पूजा से पहले इस देवता की पूजा होती है जरूरी
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प्रथम पूजनीय देव
प्रथम पूजनीय देव मां पार्वती और शिव के सुपुत्र गणपति महाराज हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की पूजा से ही सभी तरह के शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। करवा चौथ के दिन भी करवा माता की पूजा से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। आप भी अगर चाहते है की आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो तो इस दिन नियम से सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें और फिर करवा माता की पूजा करें। आइए अब जानते हैं कि कैसे करें इस दिन गणपति जी की पूजा।
गणपति जी की पूजा
करवा चौथ के दिन सुबह स्नान करने के बाद मंदिर की साफ सफाई कर लें। घर में गंगाजल का छिड़काव भी कर लें। साफ सफाई करने के बाद इस दिन अखंड ज्योति जलाएं और गणपति जी की प्रतिमा को शुद्ध जल से स्नान करवाए, फिर उन्हें नए वस्त्र पहना दें। गणपति जी को लाल रंग काफी पसंद है, उन्हें लाल फूल चढ़ाए और लाल रंग का सिंदूर भी लगाएं।
गणपति जी का भोग
इस दिन गणेश जी को भोग लगाना अति आवश्यक है। आप उन्हें मोदक का भोग लगाएं। अगर आप उन्हें मोदक का भोग नहीं लगा सकते हैं, तो उन्हें बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाए। ऐसा कहा जाता है कि गणपति जी को मीठा काफी पसंद है।
पूजा की शुरुआत में सबसे पहले गणेश जी इस आरती को करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।