Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रत, पूजा और रात्रि जागरण करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि पूरे दिन नियमों का पालन करते हुए विधि-विधान से पूजा की जाए, तो मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस दिन के लिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आवश्यक नियम क्या होते हैं।
Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर पूरे दिन करें इन नियमों का पालन, जानें व्रत संकल्प से लेकर पारण तक की विधि
महाशिवरात्रि पर पूरे दिन नियमों का पालन करते हुए विधि-विधान के साथ पूजा करने से सभी मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पूजा के चार प्रहर के शुभ मुहूर्त:
पहला प्रहर: शाम 06:19 बजे से रात 09:26 बजे तक
दूसरा प्रहर: रात 09:26 बजे से 12:34 बजे तक, फरवरी 27
तीसरा प्रहर: रात 12:34 बजे से 03:41 बजे तक, फरवरी 27
चौथा प्रहर: रात 03:41 बजे से सुबह 06:48 बजे तक, फरवरी 27
महाशिवरात्रि व्रत के नियम
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
- यदि निर्जला व्रत न कर रहे हों तो फलाहार करें। प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज करें।
- इस दिन नियमित शिव मंत्रों का जाप करें। "ॐ नमः शिवाय" और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ होता है।
- इस दिन सदाचार का पालन करना चाहिए। क्रोध, अहंकार, निंदा आदि से दूर रहें। संयमित व्यवहार रखें और मन को शांत रखें।
- इसके अलावा पूरी रात शिव भक्ति में लीन रहें और भजन-कीर्तन करें। चार प्रहर में शिवलिंग का पूजन करें।
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
- शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल अर्पित करें।
- बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, भस्म और सफेद फूल चढ़ाएं। साथ ही धूप-दीप जलाकर शिव की आरती करें और भजन गाएं।
- इस दौरान आप शिवपुराण और रुद्राष्टक का पाठ भी कर सकते हैं।
अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें। शिवरात्रि शिव-पार्वती के विवाह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन व्रत करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।