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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Maha Shivratri 2025 Shiv Ji ki Aarti Lyrics in Hindi Om Jay Shiv Omkara Aarti in Hindi

Shiv Aarti: महाशिवरात्रि पूजन के पश्चात करें ये आरती, हर मनोकामना होगी पूरी

Mon, 24 Feb 2025 12:53 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Mon, 24 Feb 2025 12:53 PM IST
सार

बिना आरती के शिवजी की पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए पूजन के पश्चात शिव आरती करना अत्यंत आवश्यक है। यहां आप भगवान शिव की आरती के पवित्र शब्दों का पाठ कर सकते हैं।

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Maha Shivratri 2025 Shiv Ji ki Aarti Lyrics in Hindi Om Jay Shiv Omkara Aarti in Hindi
Shiv Ji Ki Aarti - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Shiv ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: इस साल 26 फरवरी, बुधवार को महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का विशेष उत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था, इसलिए इसे उनका विवाह उत्सव भी कहा जाता है।

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मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने संन्यासी जीवन को त्याग कर गृहस्थ जीवन को स्वीकार किया था। भक्तगण इस दिन शिवजी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। शास्त्रों के अनुसार, स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा में कहा गया है कि बिना आरती के शिवजी की पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए पूजन के पश्चात शिव आरती करना अत्यंत आवश्यक है। यहां आप भगवान शिव की आरती के पवित्र शब्दों का पाठ कर सकते हैं।
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भगवान शिव की आरती

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।




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