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उत्पन्ना एकादशी: आज के दिन हुआ था देवी एकादशी का जन्म, जानिए पूरी कथा

Tue, 14 Nov 2017 08:25 AM IST
amarujala.com- Presented By: विनोद शुक्ला
amarujala.com- Presented By: विनोद शुक्ला Updated Tue, 14 Nov 2017 08:25 AM IST
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know about utpanna ekadashi vrat katha and its significance

सभी व्रतों में एकादशी व्रत का बड़ा महत्व होता है। मार्गशीर्ष के महीने में कृष्ण पक्ष एकादशी को उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन देवी एकादशी का जन्म हुआ था इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार यह एकादशी 14 नवंबर, मंगलवार को है। ऐसी मान्यता है कि इसी तिथि से एकादशी व्रत की शुरुआत हुई थी। आइए जानते हैं कैसे एकादशी देवी का जन्म हुआ था और क्या है पूरी कथा।



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शास्त्रों में एकादशी देवी के जन्म लेने की कथा है जिसके अनुसार मुर नामक असुर से युद्ध करते हुए जब भगवान विष्णु थक गए तब बद्रीकाश्रम में गुफा में जाकर विश्राम करने लगे। मुर भगवान विष्णु का पीछा करता हुए बद्रीकाश्रम पहुंच गया। निद्रा में लीन भगवान को मुर ने मारना चाहा तभी विष्णु भगवान के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ और इस देवी ने मुर का वध कर दिया।

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देवी के कार्य से प्रसन्न होकर विष्णु भगवान ने कहा कि देवी तुम्हारा जन्म मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ है इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। आज से प्रत्येक एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी। जो भक्त एकादशी का व्रत रखेगा वह पापों से मुक्त हो जाएगा।

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शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति इस एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के संग एकादशी देवी की पूजा करता है उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और व्यक्ति उत्तम लोक में स्थान पाने का अधिकारी बन जाता है।

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जो व्रती एकादशी उपवास को नहीं रखते हैं और इस उपवास को लगातार रखने का मन बना रहे हैं तो उन्हें मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी अर्थात उत्पन्ना एकादशी से इसका आरंभ करना चाहिये क्योंकि सर्वप्रथम हेमंत ऋतु में इसी एकादशी से इस व्रत का प्रारंभ हुआ माना जाता है। 
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