10 नवंबर को कालभैरव अष्टमी है। धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के कालभैरव स्वरुप की उत्पत्ति मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। काल भैरव अष्टमी तंत्र साधना के लिए उत्तम मानी जाती है और ऐसी मान्यता है इस दिन काल भैरव की पूजा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है। भारत में कई स्थानों पर प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर है जिसका अपना अलग-अलग महत्व है।
भारत के 5 ऐसे कालभैरव मंदिर जहां पर होती है हर मनोकामना पूरी
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काल भैरव मंदिर, काशी
वैसे तो भारत में बाबा कालभैरव के अनेक मंदिर है जिसमें से काशी के काल भैरव मंदिर विशेष मान्यता है। यह काशी के विश्वनाथ मंदिर से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद जो भक्त इनके दर्शन नहीं करता है उसकी पूजा सफल नहीं मानी जाती है।
कालभैरव मंदिर, उज्जैन
काशी के बाद भारत में दूसरा प्रसिद्ध कालभैरव का मंदिर उज्जैन नगर के क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यहां ऐसी परांपरा है कि लोग भगवान काल भैरव को प्रसाद को रुप में केवल शराब ही चढ़ाते हैं।
बटुक भैरव मंदिर,नई दिल्ली
बटुक भैरव मंदिर दिल्ली के विनय मार्ग पर स्थित है। बाबा बटुक भैरव की मूर्ति यहां पर विशेष प्रकार से एक कुएं के ऊपर विराजित है। यह प्रतिमा पांडव भीमसेन ने काशी से लाए थे।
दिल्ली में बाबा भैरव बटुक का मंदिर प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना पांडव भीमसेन के द्वारा की गई थी। वास्तव में पांडव भीमसेन द्वारा लाए गए भैरव दिल्ली से बाहर ही विराज गए तो पांडव बड़े चिंतित हुए। उनकी चिंता देखकर बटुक भैरव ने उन्हें अपनी दो जटाएं दे दीं और उसे नीचे रख कर दूसरी भैरव मूर्ति उस पर स्थापित करने का निर्देश दिया।