शास्त्रों में पूजा और जाप करने के लिए बताएं गए हैं, ये नियम
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शास्त्रों के अनुसार, अपने हाथ को हमेशा गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। साथ ही माला को हमेशा दाहिने हाथ में पकड़ना चाहिए। जाप कभी भी तेज आवाज में नहीं करना चाहिए। जहां तक संभव हो जप करते वक्त आपकी जीभ या होंठ न हिलें। मन में जाप करना बहुत अच्छा रहता है। जाप करने के बाद जिस स्थान पर आप बैठे हो उस स्थान की भूमि को स्पर्श करके प्रणाम करना चाहिए। कोई भी धार्मिक कार्य करते समय दाहिने (सीधे हाथ) का प्रयोग करना चाहिए। दान भी हमेशा सीधे हाथ से ही करना चाहिए।
आज के समय में कुछ लोग चरण स्पर्श ऐसे करते हैं, जैसे सिर्फ कोई रस्मअदायगी कर रहें हो, लेकिन इस तरह से चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए। मां के सामने हमेशा झुककर सही से प्रणाम करें, तो वहीं पिता को दण्डवत् प्रणाम करना चाहिए। देवी-देवताओं के सामने भी पूरी तरह झुककर दोनों हाथों से चरण स्पर्श करना चाहिए। शास्त्रों में सोते हुए व्यक्ति को चरण स्पर्श करने को वर्जित माना गया है। प्रणाम करते समय या देवी-देवताओं के सम्मुख हाथ सही प्रकार से जोड़ना चाहिए।
पूजा करते समय दीपक तो सभी जलाते हैं, कभी-कभी एक से अधिक दीपक भी प्रज्वलित किए जाते हैं, लेकिन दीपक जलाते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि कभी एक दीपक की बाती से दूसरा दीपक न जलाएं। दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि दीपक हमेशा देवताओं के दाहिने तरफ को रखना चाहिए। साथ ही चावल की ढेरी पर रखकर दीपक प्रजवलित करना चाहिए।
पूजा करते समय हमेशा अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए। पूजा की सारी सामाग्री पहले से ही एकत्रित कर लेनी चाहिए, जिससे पूजा करते समय क्रम न टूटे, जल का पात्र, शंख आदि पूजन सामाग्री अपने सीधे हाथ की ओर तो वहीं पूजा में बजाने वाली घंटी और धूप को अपने बांए तरफ रखना चाहिए। सभी देवी-देवताओं को तिलक लगाने के बाद अपने तिलक लगाना चाहिए। पूजा करते समय माथे पर तिलक लगा होना चाहिए।