अब शिक्षा और कानून प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। स्कूलों में सेक्स एजुकेशन दी जानी चाहिए। दरिंदगी के खिलाफ सख्त कानून होने चाहिए। सजा भी तुरंत मिले और ऐसी सजा मिले कि आरोपी की रूह कांप जाए यानी कोई भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। मंगलवार को अमर उजाला के ‘कब तक निर्भया’ संवाद में महिलाओं, छात्राओं और पार्षदों ने बेबाकी से विचार रखे। अब बच्चों को घर में भी संस्कार देने की जरूरत है। कहा कि न जाने कितनी निर्भया को दरिंदों ने दुष्कर्म के बाद मौत के घाट उतार दिया होगा। कुछ ही मामले सार्वजनिक हो पाते हैं। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। सेक्स एजुकेशन को बढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों में सेल्फ डिफेंस की तकनीक और स्पोर्ट्स विषय अनिवार्य करना होगा। इससे मानसिक और शारीरिक रूप से लड़कियां हर चुनौती का सामना कर सकेंगी। स्कूलों के अध्यापकों के साथ-साथ अभिभावकों को बच्चों में संस्कार, एक दूसरे के सम्मान का पाठ पढ़ाना होगा। कानून में अहम बदलाव और न्यायपालिकाओं में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरना होगा ताकि कोर्ट में इस तरह के लंबित मामले खत्म हो सकें। सजा का तरीका सार्वजनिक और कड़ा चुनना होगा, ताकि दुष्कर्म की सोच दरिंदों के जहन में न आए।
#KabTakNirbhaya: शिक्षा और कानून प्रणाली में बदलाव से रुकेगा महिला उत्पीड़न
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शिक्षा में बदलाव की जरूरत
दुष्कर्म की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पहले आने वाली पीढ़ी की प्रवृति में बदलाव लाना जरूरी है। यह तभी संभव हो सकता है जब शिक्षा में बदलाव लाया जाए। स्कूल में लड़कों और लड़कियों के बीच कोई लकीर नहीं खिंची जानी चाहिए। कानून में भी बदलाव लाना जरूरी है। बेटियों के साथ अगर गलत होता है तो उन्हें शिकायत करने दें, रोकें नहीं। -रिद्धि, डीएवी सीपीएस की छात्रा
गलत होने पर खुलकर आएं सामने
सरकारी और निजी स्कूलों में सेक्स एजुकेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि स्टूडेंट एक दूसरे के जेंडर को जाने और फर्क समझें। क्या भला है क्या बुरा है, इसकी पहचान करें। छेड़छाड़ के मामलों में पीड़िता को आगे आना चाहिए। लड़कों को भी स्कूल में ही एजुकेट किया जाना चाहिए। महिला के साथ गलत होने पर खुल कर सामने आना होगा। -अकांक्षा कटोच, दसवीं की छात्रा
दायरे में रहना सिखाएं
लड़कियां अपने को किसी से अलग न समझें। हम अगर लड़कियों को ऐसे मामलों में जागरूक करते हैं तो लड़कों को भी जागरूक करना जरूरी है ताकि उन्हें सही गलत का फर्क मालूम हो। दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के पीछे नशा एक मूल कारण है। लड़के और लड़कियों को फ्रेंडशिप में अपना दायरा समझना चाहिए। परिजनों को अपने बच्चों को समझाना होगा। काउंसलिंग करनी होगी। -राजेश्वरी सिंह, शिक्षिका
स्कूलों में सेल्फ डिफेंस हो जरूरी
स्कूलों में स्पोर्ट्स और सेल्फ डिफेंस अनिवार्य होना चाहिए। इससे छात्र-छात्राओं को मानसिक और शारीरिक मजबूती मिलेगी। एक स्त्री और पुरुष में बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाता, हमेशा से ही भेदभाव हो रहा है। इसे पाटना है। बेटों को नारी का आदर करना सिखाएं। समाज की सोच को बलना होगा। बच्चे नशेड़ी हैं तो अभिभावकों को उनसे बात करनी पड़ेगी। समझाना होगा। -अलकनंदा हांडा, पार्षद एवं एडवोकेट