भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा मुख्यमंत्री जयराम के साथ शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर शुक्रवार सुबह 10.57 पर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अंतिम दर्शन करने पहुंचे। नड्डा ने वीरभद्र सिंह के अंतिम दर्शन कर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। नड्डा ने कहा कि पांच दिन पहले मैं मुख्यमंत्री के साथ अस्पताल में उनको देखने आया था। उस समय वे रिकवर कर रहे थे, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। आज काल ने उनको हमसे छीन लिया है। यह बहुत दुखद घड़ी है। हमारे राजनीतिक विचार अलग-अलग थे, फिर भी उनके प्रति सम्मान था। उनसे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। वी एग्री टू डिसएग्री बट वी रिस्पेक्टेड ईच अदर सेंटिमेंट्स एंड फीलिंग।
मैं मानता हूं कि यह प्रदेश की बहुत बड़ी क्षति है। एक बहुत बड़ा नेता जिसने प्रदेश के लिए बहुत कुछ किया, वह आज हमारे बीच नहीं है। व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए भी क्षति है।
जब वे मुख्यमंत्री थे तो मुझे विपक्ष का नेता बनने का मौका मिला। मेरे लिए वे गाइड थे। हम एक दूसरे का सम्मान करते थे। आज मैं मानता हूं कि हमने ऐसी शख्सियत को खो दिया, जिससे हिमाचल प्रदेश लाभान्वित हुआ है।
ऐतिहासिक रिज मैदान पर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। प्रदेश के कोने-कोने से लोग श्रद्धा सुमन अर्पित करने आए थे। हर किसी की इच्छा थी कि वीरभद्र सिंह के अंतिम दर्शन करें। लोग घंटों लाइनों में खडे़ होकर अपने चहेते नेता के अंतिम दर्शन के लिए खड़े रहे।
इंडियन कॉफी हाउस के कर्मचारी एवं अर्की के निवासी नागेंद्र ठाकुर ने कहा कि वीरभद्र सिंह गरीबों का मसीहा थे। लोगों के दर्द को समझकर उन्हें दूर करने में पूरा जीवन लगा दिया। आज उनके अंतिम दर्शन के लिए आया हूं। ननखड़ी निवासी एलआर खाची ने कहा कि उनके जाने पर ऐसा लग रहा मानों पूरा प्रदेश अनाथ हो गया। कहा कि उनके लिए मन में सम्मान ही अंतिम दर्शन के लिए यहां खींच लाया। इनके दरबार से कभी कोई खाली नहीं गया। चौपाल के कुपवी की रहने वाली उषा ने बताया कि उन्होंने जीवन भर सबका भला किया। उन्होंने प्रदेश की जनता के लिए जो किया कोई और नहीं कर सकता। वो सही मायने में राजा थे, उनका तो आशीर्वाद मिल जाए वही काफी होता है। चौपाल की गड़ा पंचायत के प्रधान दिनेश गुंटा बोले लोगों के दिलों में राज करने वाला ऐसा नेता आज तक नहीं देखा। वो महान व्यक्ति थे, चौपाल में आज तक जो हुआ, उन्हीं के हाथों से हुआ है। इसलिए उन्हें अंतिम बार फूल चढ़ाने आया हूं।