हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल के उदयपुर स्थित जोवरंग में स्नो फेस्टिवल के तहत योर उत्सव मनाया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने बर्फ की शिवलिंग बनाकर इसकी पूजा-अर्चना की। लोगों ने पारंपरिक परिधानों में शिवलिंग के चारों ओर नृत्य किया। 75 दिनों तक चलने वाले उत्सव में लाहौल-स्पीति की पारंपरिक संस्कृति के दर्शन हो रहे हैं।
योर उत्सव में ग्रामीणों ने बर्फ से करीब आठ फीट ऊंचा शिवलिंग बनाया। पारंपरिक वेशभूषा, मुखौटा पहनकर पूजा की। ग्रामीणों ने इलाके में अच्छी फसल व खुशहाली की कामना की। योर उत्सव को शिव की पूजा के रूप में मनाया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना कि योर उत्सव सदियों से मना रहे हैं।
कुछ साल पहले योर उत्सव को मनाना बंद किया तो प्रकृति के प्रकोप से ग्लेशियर आने से गांव के कई घर दबे गए थे। इसके बाद हर साल योर उत्सव का आयोजन पारंपरिक तरीके से किया जाता है। उत्सव में तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा मौजूद रहे।
कहा कि लुप्त हो रही जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को स्नो फेस्टिवल के माध्यम से जीवित व संरक्षित किया जा रहा है। जनजातीय विकास विभाग की ओर से इन उत्सवों के बारे में जानकारी को संग्रहित कर पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे शेष विश्व व आने वाले भविष्य के लिए भी इस सांस्कृतिक इतिहास को सुरक्षित रखा जा सके।
वहीं, रानिका पंचायत के कीरतिंग गांव में स्नो फेस्टिवल मनाया जा रहा है। इसके तहत राइंक जातर के पहले दिन शनिवार को खेल गतिविधियों में रस्साकशी के मुकाबले रोचक रहे। प्रतियोगिता का शुभारंभ जिप लाहौल-स्पीति के चेयरमैन रमेश रुअलवा ने किया। बैलों से हल जोतकर धरती पूजन (हड़पुना) किया गया। स्थानीय लोगों ने पारंपरिक अंदाज में मुख्यातिथि का स्वागत किया। महिला रस्साकशी में कीरतिंग, शांशा, यंग कीरतिंग, ठपाक और ढवांशा की महिलाओं ने भाग लिया। इसमें महिला मंडल ढवांशा ने पहला स्थान हासिल किया।
पुरुष वर्ग में कीरतिंग, शांशा, यंग कीरतिंग, ठपाक और ढवांशा की टीम ने हिस्सा लिया। कीरतिंग युवक मंडल ने पहला स्थान पाया। पुरुष वर्ग के तीरंदाजी के एकल मुकाबले में शांशा के रमन ने 10 अंक लेकर पहला पहला स्थान हासिल किया। बुनाई मुकाबले में कीरतिंग की वीना ने पहला स्थान हासिल किया, ठपाक से रजनी दूसरे स्थान पर रहीं। कताई मुकाबले में ढवांशा से बिमला पहले और यंग कीरतिंग से शांति ने दूसरे स्थान पाया।