अंतरराष्ट्रीय समर फेस्टिवल शिमला की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में पहाड़ी लोकगायक नाटी किंग कुलदीप शर्मा ने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर खूब धमाल मचाया। इस दौरान कुलदीप शर्मा की नाटियों पर रिज पर सजे पंडाल में दर्शक जमकर थिरके। कुलदीप शर्मा के मंच पर पहुंचते ही दर्शकों की भीड़ में नया जोश देखने को मिला। दर्शकों ने सीटियां बजाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। लोक गायक कुलदीप शर्मा ने सरस्वती वंदना से सांस्कृतिक संध्या में प्रस्तुति का आगाज किया। इसके बाद उन्होंने लागा ढोलो रा ढमाका मेरा हिमाचल बड़ा बांका..,गीत गाया।
इस गीत के बाद कुलदीप ने अपनी लोकप्रिय और चर्चित नाटियों का सिलसिला जो शुरू किया उससे दर्शक लगातार झूमना शुरू हुए। उन्होंने एक से बढ़कर गाए लोकगीतों पर करीब एक घंटे तक दर्शकों को नचाया। उत्तराखंड के गीत पर दर्शकों से मोबाइल की लाइट जलवाकर दीवाली जैसा माहौल बनाया। करीब 9:30 बजे कुलदीप मंच पर आए और एक से बढ़कर कई शानदार प्रस्तुतियां दी।
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लोक गायक कुलदीप शर्मा।
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कुलदीप शर्मा ने 2005 में पहला स्टेज शो इसी मंच पर दिया था। कुलदीप ने मंच से पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला और बॉलीवुड गायक केके की याद में गाना गाया और दिवंगत कलाकारों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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कुलदीप के गानों पर जमकर झूमे युवा।
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कुलदीप शर्मा ने एडीसी से कार्यक्रम देने वाले सभी कलाकारों का मेहनताना बढ़ाने की मांग उठाई। कहा कि कलाकारों ने कोरोना के कारण दो सालों से मुश्किल समय काटा है। मंगलवार को फेस्टिवल की तीसरी संध्या पर हंस राज रघुवंशी प्रस्तुति देंगे।
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बजंतरियों ने देवधुनों से किया मंत्रमुग्ध
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मालरोड पर बजंतरियों ने देवधुनों से किया मंत्रमुग्ध
अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव शिमला के दूसरे दिन सोमवार को नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता हुई। साहित्य उत्सव में देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति की झलक देखने को मिली। सोमवार को पुलिस रिपोर्टिंग रूम के सामने पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता हुई।
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बजंतरियों ने देवधुनों से किया मंत्रमुग्ध
- फोटो : अमर उजाला
बजंतरियों ने एक से बढ़कर एक धुनें बजाकर वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया। ढोल-नगाड़े, करनाल और शहनाई वादकों ने न केवल आम लोगों को मंत्रमुग्ध किया बल्कि सैलानियों को भी थिरकने को मजबूर कर दिया।