फार्मा हब के रूप में उभरे और 35 फीसदी दवाओं का एशिया में निर्यात करने वाले हिमाचल प्रदेश के उद्योगों की निर्मित दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं।
हर बार केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जारी किए जाने वाले ड्रग अलर्ट में हिमाचल की दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। बीते वर्ष हिमाचल की 100 से अधिक दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं।
इस वर्ष दो माह में 27 दवाएं गुणवत्ता में खरी नहीं उतरी हैं। फरवरी माह में 37 फेल हुए सैंपलों में हिमाचल के उद्योगों की 13 दवाएं हैं। इनमें औद्योगिक हब बीबीएन की 9, सिरमौर की 3 और कांगड़ा की 1 दवा शामिल है। जनवरी माह में देश भर में 45 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इनमें हिमाचल की 14 दवा शामिल थी।
फेल हुए सैंपलों में ओरिसन फार्मा काला अंब की सेफपोडोक्साईम, सैलस फार्मा हररायपुर बद्दी की सेफेजिम एंड लैक्टिक एसिड बैसिलस, थियोन फार्मा सैणीमाजरा नालागढ़ का सेफटरीजोन एंड टैजोबेक्टम इंजेशन, ग्रेक्यूर फार्मा बेलीदयोड़ नालागढ़ की इसोपेन-20, इंडस्विफट लिमिटेड मलकूमाजरा नालागढ़ का एजिटेक इंजेक्शन शामिल है।
इसके साथ ही जैकसन लैबोरेटरी संसारपुर टैरेस कांगड़ा का कैटोरोलेक ट्रॉमेथाईन इंजेक्शन, फ्रेसेनियस काबी ऑनकोलॉजी इंडस्ट्रियल एरिया बद्दी का लियोकोवोरिन कैल्शियम इंजेक्शन, इनरिको फार्मास्यूटिकल झाड़माजरी बद्दी की लैटरोजोल, सिंबोसिस फार्मास्यूटिकल काला अंब की डॉक्सीसाइकलिन एंड लैक्टिक एसिड बैसिलस के सैंपल भी फेल हुए।