दिवंगत पंडित सुखराम हिमाचल में सियासत ही नहीं, विवादों का केंद्र भी रहे। 60 साल का जुझारू और संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन उपलब्धियों के साथ विवादों में भी रहा। केंद्रीय दूरसंचार राज्य मंत्री रहते उन्होंने देश के साथ हिमाचल में भी टेलीफोन एक्सचेंज और दूरसंचार का नेटवर्क खड़ा किया। घर-घर फोन की घंटी बजाई। टेलीफोन और पीसीओ कनेक्शन के लिए लंबे इंतजार की व्यवस्था खत्म की। पांगी और लाहौल समेत ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में फोन की घंटी बजाई, जहां उस दौर में कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। राजनीति की ऊंचाइयां छूने के साथ वह टेलीकॉम घोटालों, रिश्वतखोरी और अश्लील सीडी कांड जैसे आरोपों से भी घिरे रहे। भ्रष्टाचार के आरोपों को अदालत में चुनौती देकर खुद को बेदाग साबित करने की उनकी हसरत पूरी नहीं हो पाई। लगभग 60 साल के राजनीतिक सफर में वह दांवपेंच से भरी राजनीतिक सोच से हिमाचल की सियासत में अपनी दमदार उपस्थिति करवाते रहे। लिहाजा, उन्हें हिमाचल में राजनीति के चाणक्य का दर्जा भी मिला। बावजूद इसके उनका मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का सपना कभी पूरा नहीं हुआ।
पंडित सुखराम: हिमाचल में सियासत के रहे चाणक्य, पर विवादों ने उम्र भर नहीं छोड़ा पीछा
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 12 May 2022 10:31 AM IST
सार
लगभग 60 साल के राजनीतिक सफर में पंडित सुखराम दांवपेंच से भरी राजनीतिक सोच से हिमाचल की सियासत में अपनी दमदार उपस्थिति करवाते रहे। लिहाजा, उन्हें हिमाचल में राजनीति के चाणक्य का दर्जा भी मिला।
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