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एक ही पंचायत से उठीं 22 बच्चों की अर्थियां, छोटा पड़ गया श्मशानघाट

Wed, 11 Apr 2018 01:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नूरपुर (कांगड़ा)
अमर उजाला ब्यूरो, नूरपुर (कांगड़ा) Updated Wed, 11 Apr 2018 01:47 PM IST
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nurpur school bus accident, there is a atmosphere of mourning in six village kangra

हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के नूरपुर में निजी स्कूल वजीर राम सिंह पठानिया बस हादसे के दूसरे दिन भी दिल दहला देने वाला मंजर रहा। मंगलवार सुबह परिजनों की चीखोपुकार के बीच ठेहड़ पंचायत से 22 मासूम बच्चों की अर्थियां उठीं। खुवाड़ा गांव से कुछ मिनटों के अंतराल में 12 बच्चों की अर्थियां घरों से निकलीं। श्मशानघाट चार किलोमीटर संकरे रास्ते में और छोटा था। ऐसे में दो किलोमीटर दूर खुले में ही एक दर्जन बच्चों के अंतिम संस्कार कर दिए। 

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यहां चार भाई-बहनों की चिताएं भी एक साथ जलीं। दो माह पहले सेहरा सजाने वाले शिक्षक राजेश की भी मंगलवार को चिता सजी देख हर आंख नम हो गई। लिफ्ट लेने वाली पूनम की हाथों में भी मेहंदी नहीं रच पाई। शादी से दो माह पहले ही नम आंखों से उसे मुखाग्नि देनी पड़ी। पांच साल से कम उम्र वाले तीन बच्चों समेत एक अन्य को दफनाया गया। नूरपुर में 21 और चुवाड़ी और दुनेरा में एक-एक चिता जली। हजारों लोगों ने नम आंखों से बच्चों को अंतिम विदाई दी। मां-बाप की चीखों से दिल दहल गए। ढांढस बंधाने वाले खुद भी विलख-विलख कर रो पड़े।

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मंगलवार को ठेहड़ पंचायत के खुुवाड़ा गांव में 10 परिवारों के 12 बच्चों की एक साथ चिताएं जलीं। पंचायत के चक्की बोदू श्मशानघाट में 4 बच्चों और दो शिक्षकों, चक्की बहतपुर में 1 बच्चे और ड्राइवर मदन लाल, चक्की डाडर में 1, पंजाब के दुनेरा में 1 और लिफ्ट लेने वाली लड़की का चंबा के चुवाड़ी में अंतिम संस्कार किया गया। एक ही परिवार के तीन बच्चे ठेहड़ में, जबकि एक बच्चा सुलियाली में दफनाया गया। डाडर गांव के एक बच्चे का अंतिम संस्कार हुआ, जबकि दूसरी बच्ची पठानकोट अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है।

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ठेहड़ पंचायत के फंगोता, गतला, ठेहड़, डाडर, खुवाड़ा गांव में दिनभर चीखोपुकार रही। माताएं दूर पहाड़ी से अपने जिगर के टुकड़ों को चिता में विलीन होते देख बेसुध हो रही थीं। ठेहड़ पंचायत के उपप्रधान हरदीप सिंह ने कहा कि वैसे तो खुवाड़ा गांव का मूल श्मशान चक्की के साथ है, लेकिन वहां जगह कम और रास्ता खराब होने के कारण गांव से दो किमी दूर खुले में ही शवों को जलाया गया है।

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एक आंगन से चार, दूसरे से उठे तीन शव- खुवाड़ा के दो भाइयों राकेश और नरेश जम्वाल के घर के आंगन से चार बेटे-बेटियों के एक साथ शव उठे। ठेहड़ के मनोज-राकेश पठानिया के तीन बच्चों की शव यात्रा भी एक साथ निकली। यहां का मंजर देख हर आंख नम हो गई।

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