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देखिए 333 साल पुरानी परंपरा जो आज भी निभाई जा रही है

Wed, 12 Nov 2014 03:30 PM IST
Updated Wed, 12 Nov 2014 03:30 PM IST
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देखिए 333 साल पुरानी परंपरा जो आज भी निभाई जा रही है

lavi fair at rampur bushehar himachal pardesh

रामपुर बुशैहर का लवी मेला पिछले 333 वर्षों से बदस्तूर चल रहा है। यहां पर सदियों से लोग सामान की खरीददारी और बेचने के लिए पहुंचते हैं।




देखिए 333 साल पुरानी परंपरा जो आज भी निभाई जा रही है

lavi fair at rampur bushehar himachal pardesh

मेले में ऊनी कपड़े, पीतल के बर्तन, औजार, बिस्तर, मेवे, शहद, सेब, न्योजा, सूखी खुमानी, अखरोट, ऊन, पशम का जमकर कारोबार हो रहा है। विभिन्न नस्लों के घोड़े बिक रहे हैं।



देखिए 333 साल पुरानी परंपरा जो आज भी निभाई जा रही है

lavi fair at rampur bushehar himachal pardesh

पारंपरिक वेशभूषा की तस्वीर पेश करने के लिए जहां लोक संगीत के लिए सांस्कृतिक दल यहां पहुंचे हैं, वहीं व्यापारियों ने भी मेले में डेरा डाल दिया है।

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देखिए 333 साल पुरानी परंपरा जो आज भी निभाई जा रही है

lavi fair at rampur bushehar himachal pardesh

उत्तरी क्षेत्र में एक पारंपरिक कोटनुमा ऊनी वस्त्र पहना जाता है। इसे लोइया कहा जाता है और इसी लोइया के कारण मेले का नाम लवी पड़ा। लवी का मेला सतलुज के किनारे बसे रामपुर में आयोजित किया जाता है।


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देखिए 333 साल पुरानी परंपरा जो आज भी निभाई जा रही है

lavi fair at rampur bushehar himachal pardesh

लवी मेले में हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में बनाई जाने वाली शॉल सहित टोपियों और अन्य सामान भी मिलता है।


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