भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ ही 11 अक्तूबर तक चलने वाला अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव बुधवार को शुरू हो गया। दशहरा में जिले भर से 250 से ज्यादा देवी-देवता पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस पावन अवसर के साक्षी बने। भव्य रथयात्रा को देख मोदी गदगद हो उठे। मोदी ने भगवान रघुनाथ को एक टोकरी में चढ़ावा भी चढ़ाया। वहीं भगवान रघुनाथ के कारदार ने उन्हें बग्गा (पगड़ी) दुपट्टा, फूलों की माला और प्रसाद की टोकरी दी। मोदी ने रघुनाथ के पुजारी कमल किशोरी से बिजली महादेव के बारे में पूछा तो बताया कि सामने बिजली महोदव जी का रथ है।
मोदी ने वहीं से बिजली महादेव को प्रणाम किया। इसके बाद वह हाथ हिलाते हुए मंच पर आए और भव्य रथयात्रा का आनंद उठाया। मोदी सेना के हेलिकाप्टर से 2:35 बजे भुंतर हवाई अड्डे पहुंचे। कुछ देर रुकने के बाद मोदी का काफिला कड़ी सुरक्षा के बीच भुंतर से कुल्लू के लिए वामतट होकर रवाना हुआ। दोपहर बाद 3:10 बजे मोदी रथ मैदान पहुंचे और उनके आगमन पर रथ मैदान में उमड़ा जनसैलाब जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
2 of 7
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा
- फोटो : संवाद
ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में 3:50 बजे जय सिया राम के उद्घोष के साथ भगवान रघुनाथ का रथ चल पड़ा। साथ ही सैकड़ों देवी-देवता भी अपनी पालकियों में रघुनाथ के साथ चल पड़े। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का शुभारंभ हो गया। भगवान रघुनाथ का रथ खींचने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। श्रद्धालुओं ने भगवान रघुनाथ के रथ को खींचने के लिए लगाए रस्से को हाथ लगाकर पुण्य कमाया।
3 of 7
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा
- फोटो : संवाद
देवता बिजली महादेव, माता हिडिंबा, नाग धूमल समेत सैकड़ों देवताओं ने रथयात्रा में हिस्सा लिया। हर कोई देव आस्था के रंग में रंग गया। खास बात यह रही कि इस पल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर भी साक्षी बने। इससे पहले 3:15 बजे भगवान रघुनाथ ढोल-नगाड़ों के साथ पालकी में सवार होकर रथ मैदान पहुंचे।
4 of 7
कुल्लू दशहरा।
- फोटो : संवाद
भगवान रघुनाथ के साथ देवता बिजली महादेव, देवता वीरनाथ, देवता जुआणी महादेव आदि भी आए। भगवान रघुनाथ के मैदान में पहुंचते ही देवताओं का आना शुरू हुआ। माता हिडिंबा भी लाव-लश्कर के साथ पहुंचीं। देवता गौहरी, माता भागासिद्ध सहित अन्य देवता भी अपने-अपने स्थानों पर खड़े हो गए।
5 of 7
कुल्लू दशहरा।
- फोटो : संवाद
इसके बाद भगवान रघुनाथ की पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ। रथयात्रा शुरू होने से पहले भगवान रघुनाथ के रथ की परिक्रमा की गई। इसमें कुछ देवताओं ने भी हिस्सा लिया। ढालपुर में गंतव्य तक पहुंचने के बाद अब भगवान रघुनाथ सहित अन्य देवी-देवता अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए हैं। यहां सात दिन तक उनकी पूजा-अर्चना होगी।