कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बाबा भूतनाथ मंदिर में 20 मिनट तक पूजा-अर्चना की। वह 12: 45 बजे कांगणी हेलीपैड पर पहुंचीं। यहां से सड़क मार्ग से 12:50 बजे बाबा भूतनाथ मंदिर पहुंचीं। मंदिर के बाहर उन्होंने पूजा की सामग्री ली और इसे मंदिर के महंत को दिया। महंत ने प्रियंका के माथे पर चंदन का लेप लगाया और पूजा-अर्चना करवाई। प्रियंका ने बाबा भूतनाथ मंदिर की परिक्रमा भी की। राधा कृष्ण और श्री गणेश के मंदिर में माथा टेका।
प्रियंका मंदिर के गर्भगृह में नहीं जा सकीं, क्योंकि यहां केवल साड़ी, लहंगा या धोती डालकर ही जाया जा सकता है। बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि कुछ देर के लिए प्रियंका, प्रतिभा सिंह और भूपेश बघेल धूने के पास भी बैठे। बाद में मंदिर के दानपात्रों में चढ़ावा भी चढ़ाया। इसके बाद प्रियंका ने प्रोटोकाल को तोड़कर मंदिर के पास खड़ीं महिलाओं से बातचीत की और उनके साथ सेल्फी भी ली। वह एक बुजुर्ग महिला को प्रणाम करते हुए और स्थानीय दुकानदारों से मिलकर उनका अभिवादन स्वीकार करते हुए गाड़ी तक पहुंचीं।
मोदी भी हैं बाबा भूतनाथ के भक्त- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बाबा भूतनाथ के भक्त हैं। वह जब भी मंडी आते हैं तो सेपू बड़ी के साथ बाबा भूतनाथ मंदिर का जिक्र करना नहीं भूलते। वह बाबा भूतनाथ के ऑनलाइन दर्शन कर चुके हैं। मंडी आने पर हमेशा अपने संबोधन से पहले बाबा भूतनाथ को प्रणाम करते हैं।
1500 साल पुराना है बाबा भूतनाथ मंदिर- बाबा भूतनाथ का मंदिर 1500 साल पुराना है। मान्यता है कि प्राचीन समय में एक ग्वाला अपनी गाय को चराने के लिए मंडी आता था तो गाय एक स्थान पर खड़ी हो जाती और उसके थनों से अपने आप ही उस स्थान पर दूध निकलने लगता था। यह बात चारों ओर फैल गई। इसी बीच उस समय के राजा अजबेर सेन को भगवान शिव ने सपने में आकर कहा कि जिस स्थान पर गाय के थनों से अपने आप ही दूध निकलता है, उस स्थान पर उनका शिवलिंग हैं। इस पर राजा ने खुदाई करवाई तो शिवलिंग मिली। इसके बाद राजा ने यहां शिखरा शैली में मंदिर का निर्माण करवाया।
छोटी काशी में भावनात्मक कार्ड खेल गईं प्रियंका- छोटी काशी में प्रियंका गांधी वाड्रा भावनात्मक कार्ड खेल गईं। रैली का आरंभ उन्होंने मंडी के आराध्य देव बाबा भूतनाथ के आशीर्वाद के बाद किया। रैली के दौरान हिमाचल और मंडी की समृद्ध संस्कृति को उन्होंने बखूबी छूने की कोशिश की। अपनी दादी इंदिरा गांधी के हिमाचल के प्रति लगाव से संबोधन शुरू करने के बाद उन्होंने हिमाचल के निर्माण से लेकर विकास तक की गाथा में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत यशवंत सिंह परमार और दिवंगत वीरभद्र सिंह को याद करने के साथ किसानों, सैनिकों और कर्मचारियों का जिक्र किया और हर एक की सराहना की।