मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। इसमें सैंकड़ों पदों को भरने सहित अन्य फैसले शामिल हैं। सरकार ने निजी उद्योगों में कम वेतन पा रहे हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को दिवाली से पहले बड़ा तोहफा दिया है। इन कामगारों को सरकार दो साल तक हर महीने 1000 रुपये और 50 फीसदी से अधिक दिव्यांगों को 1500 रुपये कौशल विकास भत्ता देगी। यह भत्ता निजी क्षेत्र में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों को मिलेगा जिनका मासिक वेतन 15000 रुपये तक है। इस फैसले का प्रदेश के 4200 उद्योगों में काम कर रहे करीब 50 हजार युवा कामगारों को लाभ मिलेगा। सरकार अभी तक बेरोजगारों को ही कौशल भत्ता दे रही थी।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग निशुल्क दी जाएगी। सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मेधा प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई है। योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता या वास्तविकता के अनुसार जो भी कम हो, ऐसे मेधावी छात्रों को प्रदान की जाएगी। 2.50 लाख रुपये सालाना आय वाले परिवारों के मेधावी विद्यार्थी इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होंगे।
पांच करोड़ के बजट प्रावधान के साथ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस योजना को शुरू करने की अपने पहले बजट भाषण में घोषणा की थी। मेधा प्रोत्साहन योजना के तहत जमा दो के विद्यार्थियों को जेईई मेन और नीट तथा उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए कोचिंग दिलाई जाएगी। कॉलेज स्टूडेंट्स को रोजगार आधारित प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे सिविल सेवा की तैयारियों के लिए कोचिंग दिलाई जाएगी।
मेधा प्रोत्साहन योजना के तहत राज्य में या राज्य से बाहर कोचिंग के लिए सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्रिमंडल ने हिमाचल के मेधावी विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग की ओर से आयोजित की जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग के लिए मेधा प्रोत्साहन योजना को शुरू करने का निर्णय लिया। योजना के तहत सीएलएटी, एनईईटी, आईआईटी, जेईई, एम्स, एएफएमसी, एनडीए आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग सुविधा प्रदान की जाएगी।
जंगी थोपन-पोवारी बिजली परियोजना को प्रदेश सरकार ने एसजेवीएनएल के हवाले कर दिया है। सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किन्नौर जिले में 780 मेगावाट जंगी थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य सतलुज जल विद्युत निगम को देने का निर्णय लिया गया। राज्य मंत्रिमंडल ने फैसला लिया कि ऊर्जा विभाग केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों व प्रदेश के सार्वजनिक उपक्रमों को आवंटित योजनाओं के निर्माण के लिए एक समय सीमा निर्धारित करेगा।