मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित की गई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। बैठक में 200 से ज्यादा पदों को भरने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही करीब 75 गांव शहरी एवं नगर नियोजन(टीसीपी) के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा चार जिलों शिमला, कांगड़ा, मंडी और कुल्लू में रात्रि कर्फ्यू पांच जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। मंत्रियों, विधायकों की ओर से किए जाने वाले उद्घाटन, शिलान्यास और सभाओं के वास्तविक समारोहों पर लगाई बंदिश भी हटा दी है। हालांकि, शादी-विवाह की तरह इन कार्यक्रमों में भी सिर्फ 50 लोग ही मौजूद रहेंगे। कैबिनेट ने फैसला लिया कि सरकार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर करवाने को तैयार है। मंत्रिमंडल ने शिमला, नालागढ़, टांडा और नेरचौक में मेक शिफ्ट अस्पतालों को कार्यशील करने के लिए कार्योत्त्तर स्वीकृति प्रदान करने को अपनी अनुमति दी। इसमें से 50 प्रतिशत धनराशि सीएसआईआर/सीबीआरआई रुड़की को पहले ही प्रदान की जा चुकी है। मंत्रिमंडल ने निजी भूमि से पेड़ों को काटने के लिए 10 वर्षीय पेड़ कटान कार्यक्रम के संदर्भ में बड़ा फैसला लिया है।
हिमाचल में 200 से ज्यादा पदों को भरने की मंजूरी, टीसीपी से बाहर होंगे ये गांव, जानें कैबिनेट के बड़े फैसले
मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश भूमि संरक्षण अधिनियम 1978 के तहत 10 सितंबर 2002 को जारी आदेश संख्या एफएफएफबीए (3) 4/99 के पैरा-1 और 6 को संशोधित करने को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत सरकार को अब 200 से अधिक पेड़ों के स्थान पर 400 से अधिक पेड़ काटने की अनुमति देने का अधिकार होगा। वहीं, वन उपमंडल अधिकारी (डीएफओ) को एक वर्ष में 50 पेड़ों के स्थान पर 200 पेड़ काटने की अनुमति प्रदान करने का अधिकार होगा जबकि संबंधित मुख्य अरण्यपाल वन/ अरण्यपाल वन को एक वर्ष में 100 के स्थान पर 300 पेड़ और प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन को एक वर्ष में 200 पेड़ के स्थान पर 400 पेड़ काटने की अनुमति देने का अधिकार होगा।
मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय लिया कि यदि पेड़ निर्धारित वर्ष में नहीं काटे गए तो सक्षम प्राधिकारी इस अवधि को एक वर्ष तक बढ़ा सकता है। इस दौरान यह देखा जाएगा कि भूमि की डिमार्केशन और पेड़ों की मार्किंग की प्रक्रिया निर्धारित एक वर्ष के भीतर पूर्ण की गई हो। साथ ही संबंधित डीएफओ द्वारा कटाई के आदेश दिए गए हों लेकिन पेड़ों की कटाई नहीं की गई हो या आंशिक रूप से की गई हो। वहीं जहां भूमि की डिमार्केशन प्रक्रिया और पेड़ों की मार्किंग की प्रक्रिया निर्धारित वर्ष के भीतर पूर्ण कर ली गई हो लेकिन कटाई के आदेश जारी नहीं किए गए हों, वहां भी सक्षम अधिकारी मियाद बढ़ा सकता है। मंत्रिमंडल ने जनहित में उपमहानिरीक्षक के कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने को भी अपनी सहमति प्रदान की। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला के रेडियोथेरैपी विभाग के तहत दर्द और प्रशामक देखभाल सैल बनाने के लिए भी अपनी सहमति दी।
मंत्रिमंडल ने राज्य के कुछ क्षेत्रों को हिमाचल प्रदेश शहरी एवं नगर नियोजन अधिनियम-1977 के दायरे से बाहर करने की मंत्रिमंडलीय उपसमीति की सिफारिशों को स्वीकृति प्रदान की। मंत्रिमंडल ने चंबा जिला के भरमौर विशेष क्षेत्र में राजस्व मोहाल पाल्दा, राजौर और चलेड़, सोलन जिला के वाकनाघाट नियोजन क्षेत्र में बानी, बरोड़, माल्गा और सुधारग मोहाल व मंडी नियोजन क्षेत्र के आरडा और मन्याना राजस्व मोहाल को बाहर करने का निर्णय भी लिया गया। इसके तहत इन जिले के करीब 75 गांवों को टाउन एंड कंट्री प्लांनिग (टीसीपी) एरिया से बाहर करने को मंजूरी दे दी। वर्ष 2017 से लोगों ने टीसीपी एरिया से बाहर करने के लिए आवेदन दिया था। इसके अलावा कांगड़ा, शिमला, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, सिरमौर आदि जिलों के कुछ गांवों को अंतरिम रिपोर्ट के बाद ही टीसीपी एरिया से बाहर करने का निर्णय लिया जाएगा, क्योंकि कई गांवों के मामले सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी, हाईकोर्ट में चल रहे हैं।
मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वरोजगार अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण विकास विभाग में आउटसोर्स आधार पर विभिन्न श्रेणियों के 131 पदों को भरने का निर्णय लिया। बैठक में कांगड़ा जिला के मझीन में लोक निर्माण विभाग के नए उपमंडल के सृजन सहित मझीन और सेओरबाला में दो नए सेक्शन के अतिरिक्त विभिन्न श्रेणियों के छह पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा के आठ पद सीधी भर्ती से भरने को स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रिमंडल ने बिलासपुर, नूरपुर और बद्दी में जिले में फॉरेंसिक इकाइयां स्थापित करने के अतिरिक्त विभिन्न श्रेणियों के 12 पदों के सृजन और भरने का निर्णय लिया। मंत्रिमंडल ने राज्य के कृषि विभाग में कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) के 25 पदों के सृजन और सीधी भर्ती से अनुबंध आधार पर भरने का निर्णय लिया।