हिमाचल के दाड़लाघाट के पास चमाकड़ी में हुए बस हादसे के घायलों को अगर समय पर बेहतर उपचार मिलता तो कुछ लोगों की जान बच सकती थी। सही ईलाज न मिलने से कई लोगों की जान चली गई।
हादसे के बाद हर तरफ चीख-पुकार, ईलाज न मिलने से गई कई जानें, तस्वीरें
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चिकित्सकों की कमी के कारण घायलों को ईएसआई अस्पताल दाड़लाघाट में भी पर्याप्त इलाज नहीं मिला। हादसे के वक्त महज आयुर्वेदिक चिकित्सक वहां मौजूद था। वहीं, अर्की अस्पताल में भी एक ही चिकित्सक था।
हालांकि बाद में आसपास से चिकित्सक बुला लिए गए, लेकिन तब तक काफी देर हो गई थी। आनन फानन में घायलों को सीधा 60 किलोमीटर दूर आईजीएमसी शिमला भेजना पड़ा और रास्ते में तीन घायलों ने जख्मों के ताव न सहते हुए दम तोड़ दिया, जबकि कई घायलों की हालत बिगड़ गई।
हादसे के दौरान डेढ़ साल की बच्ची अचानक गायब हो गई। मां रोती चिल्लाती रही। रेस्क्यू टीम ने बच्ची को खोजना शुरू किया। पूरे नाले का चप्पा चप्पा छान मारा, लेकिन बच्ची नहीं मिली। जहां से बस गिरी थी वहीं, बच्ची बाहर आ गिरी और झाडियों में फंस गई।
बच्ची की रोने की आवाज सुनकर ग्रामीणों से उसे बाहर निकाला। बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है। एसडीएम एलआर वर्मा ने कहा कि एक घंटे की मशक्कत के बाद बच्ची मिली है। वह झाड़ियों में फंसी थी।