ऐसा पहली बार नहीं है, जब नमज्ञा पंचायत के डोगरी नाले में हिमखंड खिसकने से सेना के जवानों की जान गई हो। इससे पहले 18 जनवरी, 1974 को इस नाले में हिमखंड खिसकने से इसी चपेट में दो जवान आए थे।
इनमें एक जवान की जान चली गई थी। खुखरी से बर्फ काटकर बार्डर स्काउट के एक जवान ने अपनी जान बचाई थी। पूर्व सैनिक गंगा सागर आज भी इस हादसे को नहीं भूल पाए हैं। 18 जनवरी, 1974 में नमज्ञा पंचायत के डोगरी नाले में हिमखंड खिसका था।
इसकी चपेट में पेट्रोलिंग कर रहे दो जवान आ गए थे। बार्डर स्काउट के दो सैनिक हिमखंड में दब गए थे। जिला किन्नौर के मूरंग निवासी सूबेदार गंगासागर नेगी ने बताया कि वर्ष 1974 में वह और उनका साथी जवान ग्लेशियर की चपेट में आए थे।
दो घंटे बाद रेस्क्यू टीम को संकेत मिला तो उनकी जान बच पाई। नेगी ने बताया कि उस वक्त उनकी नमज्ञा लॉ कोमा में बार्डर स्काउट में पोस्टिंग थी, उस समय भारी हिमपात हुआ था। दो जवान पेट्रोलिंग पर निकले थे। पहाड़ी से अचानक ग्लेशियर खिसक गया।
दोनों इसकी चपेट में आ गए। स्थिति को देखते हुए वे एक डोआर (छोटी गुफा) में अटक गए। उनके पास खुखरी थी। इससे उन्होंने अपने ऊपर की तरफ बर्फ को काटना शुरू किया। लगभग दो घंटे बाद वह सुराख निकालकर खुखरी को हिलाने लगे। रेस्क्यू दल ने उनकी जान तो बचा ली, लेकिन उन्हें आज भी अपने साथ को खोने का मलाल है।