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Ganesh Chaturthi : चमत्कारी त्रिनेत्र गणेश मंदिर, जहां भक्त बप्पा को चिट्ठी लिखकर लगाते हैं अपनी अर्जी

Wed, 31 Aug 2022 08:03 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Wed, 31 Aug 2022 08:03 AM IST
सार

सवाई माधोपुर के रणथंभौर किले के अंदर चमत्कारी त्रिनेत्र गणेश मंदिर है। मान्यता है कि बप्पा अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

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Trinetra Ganesh Temple Sawai Madhopur devotees writes letter to god
त्रिनेत्र गणेश मंदिर - फोटो : Social Media

राजस्थान की राजधानी जयपुर से 150 किलोमीटर दूर सवाई माधोपुर के रणथंभौर किले के अंदर एक प्रसिद्ध गणेश मंदिर है। यहां के विनायक को भारत का प्रथम गणेश कहते हैं, जिनकी तीन आखें हैं। यह देश का पहला मंदिर है, जिसमें भगवान अपनी दोनों पत्नी रिद्धि-सिद्धि और पुत्र शुभ-लाभ के साथ विराजमान हैं।

Trinetra Ganesh Temple Sawai Madhopur devotees writes letter to god
त्रिनेत्र गणेश मंदिर - फोटो : Social Media

त्रिनेत्र गणेश मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां आने वाले पत्र हैं। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होती है। इसलिए देशभर से भक्त अपने घर में होने वाले हर मंगल कार्य का पहला निमंत्रण पत्र त्रिणेत्र गणेश को भेजते हैं। इसके साथ ही श्रद्धालु डाक से अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए भगवान को अर्जी लगाते हैं। 

Trinetra Ganesh Temple Sawai Madhopur devotees writes letter to god
मंदिर में सपरिवार विराजमान हैं गणेश - फोटो : Social Media

मंदिर में पोस्टमैन भक्तों के डाक लेकर पहुंचता है। डाक भेजने का पता है-'श्री गणेश जी, रणथंभौर का किला, जिला-सवाई माधोपुर, राजस्थान। मंदिर के पुजारी सभी चिट्ठियों और निमंत्रण को भगवान के चरण में रख देते हैं।

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Trinetra Ganesh Temple Sawai Madhopur devotees writes letter to god
मंदिर में बड़ी संख्या में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : Social Media
कृष्ण गणेशजी की पूजा करना भूल गए

एक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण का विवाह रूकमणी से हुआ था। इस विवाह में कृष्ण गणेशजी को बुलाना भूल गए। जिसके बाद क्रोधित गणेशजी के वाहन मूषकों ने कृष्ण के रथ के आगे-पीछे सब जगह गड्ढा खोद दिया। ऐसे में कृष्ण ने तुरंत गणेशजी को मनाया। कहा जाता है की तभी से गणेशजी हर मंगल कार्य करने से पहले पूजे जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने जहां गणेशजी को मनाया, वह स्थान रणथंभौर था। यही कारण है कि रणथंभौर गणेश को भारत का प्रथम गणेश भी कहते हैं। दूसरी मान्यता ये भी है कि भगवान राम ने लंका कूच से पहले गणेश जी के इसी रूप का अभिषेक किया था। 

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रणथंभौर किले के अंदर है मंदिर - फोटो : Social Media
महाराजा हमीरदेव ने करवाया मंदिर का निर्माण

तीसरी पौराणिक कहानी अलाउद्दीन खिलजी और महाराज हमीरदेव से जुड़ी है। महाराजा हमीरदेव और अलाउद्दीन खिलजी के बीच सन 1299-1301 को रणथंभौर में युद्ध हुआ था। उस समय अलाउद्दीन खिलजी के सैनिकों ने दुर्ग को चारों ओर से घेर लिया। ऐसे में महाराजा हमीरदेव के सपने में भगवान गणेश ने आकर कहा कि मेरी पूजा करोगे तो सभी समस्याएं दूर हो जाएगी। इसके ठीक अगले ही दिन किले की दीवार पर त्रिनेत्र गणेश की मूर्ति इंगित हो गई और उसके बाद हमीरदेव ने उसी जगह भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। कहते हैं कि भगवान के आशीर्वाद से कई सालों से चला आ रहा युद्ध भी समाप्त हो गया।

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