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Sawan 2022: राजस्थान में है देश का एकमात्र शिव मंदिर, जहां होती है महादेव के अंगूठे की पूजा

Mon, 25 Jul 2022 12:22 PM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: रोमा रागिनी Updated Mon, 25 Jul 2022 12:22 PM IST
सार

Sawan 2022: राजस्थान में है देश का एकमात्र शिव मंदिर, जहां होती है महादेव के अंगूठे की पूजा

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Sawan 2022 Shri Achaleshwar Mahadev Temple of Mount Abu of Rajasthan
अचलेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : Social Media

अभी तक आपने मंदिरों में शिवलिंग और शिव प्रतिमा के दर्शन किए होंगे लेकिन आज हम आपको महादेव के उस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां शिव के पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है। 


 
Sawan 2022 Shri Achaleshwar Mahadev Temple of Mount Abu of Rajasthan
अचलेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : Social Media

चार टन के नंदी की प्रतिमा स्थापित
सिरोही के हिल स्टेशन माउंट आबू से करीब 11 किलोमीटर दूर अचलगढ़ की पहाड़ियों पर अचलेश्वर महादेव मंदिर है। इस मंदिर में प्रवेश करते ही पंच धातु की बनी नंदी की प्रतिमा है। जिसका वजन चार टन है।

Sawan 2022 Shri Achaleshwar Mahadev Temple of Mount Abu of Rajasthan
अचलेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : Social Media

गर्भगृह में शिव के अंगूठे का निशान
वहीं मंदिर के अंदर गर्भगृह में शिवलिंग पाताल खंड के रूप में दिखाई देता है। जिसके ऊपर एक तरफ पैर के अंगूठे का निशान उभरा है। यह शिव का दाहिना अंगूठा माना जाता है। कहा जाता है कि इसी अंगूठे ने माउंटआबू के पहाड़ को थाम रखा है। जिस दिन निशान गायब हो जाएगा, उस दिन माउंटआबू के पहाड़ खत्म हो जाएंगे।

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Sawan 2022 Shri Achaleshwar Mahadev Temple of Mount Abu of Rajasthan
मंदिर का गर्भगृह - फोटो : Social Media
पौराणिक कथा

मंदिर को लेकर पौराणिक कथा है कि आबू पर्वत के नीचे ब्रह्मा खाई थी। इसी के पास वशिष्ठ मुनि रहते थे। उनकी कामधेनु गाय एक बार ब्रह्म खाई में गिर गई। तब उसे बचाने के लिए मुनि ने सरस्वती और गंगा का आह्वान किया। जिसके बाद ब्रह्म खाई पानी से जमीन की सतह तक भर गई। ऐसे में कामधेनु गाय बाहर आ गई। हादसे को टालने के लिए वशिष्ठ मुनि ने हिमालय जाकर ब्रह्म खाई को पाटने का अनुरोध किया। तब हिमालय ने अपने पुत्र नंदी वद्रधन को खाई पाटने का काम सौंपा। 

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Sawan 2022 Shri Achaleshwar Mahadev Temple of Mount Abu of Rajasthan
अचलेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : Social Media

कहते हैं कि अर्बुन नाग नंदी वद्रधन को उड़ाकर ब्रह्म खाई के पास वशिष्ठ आश्रम लाया था। आश्रम में नंदी वद्रधन ने वरदान मांगा कि उसके ऊपर सप्त ऋषियों का आश्रम होना चाहिए। वहीं पहाड़ सबसे सुंदर और वनस्पतियों वाला होना चाहिए। वशिष्ठ ने वरदान दिया। इसी प्रकार अर्बुद नाग ने वर मांगा कि पर्वत का नामकरण उसके नाम से हो। वरदान मिलते ही नंदी वद्रधन खाई में उतरा तो वो धंसता ही गया। केवल नंदी वद्रधन की नाक और ऊपर का हिस्सा जमीन से ऊपर रहा, जो अब आबू पर्वत है।

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