राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्कूल की छत गिरने से हुई सात बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया। सबसे ज्यादा दहशत उन परिवारों में हुई जिनके बच्चे उन सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, जिनकी बिल्डिंग की हालत खस्ता है। इस हादसे में सबसे बड़ी लापरवाही जिला प्रशासन और सरकार की मानी जा रही है, क्योंकि जब स्कूल की बिल्डिंग जर्जर थी तो उसमें कक्षाएं क्यों लगाई जा रही थीं।
Rajasthan School Collapsed: सात बच्चों की मौत, स्वागत पर घिरे शिक्षा मंत्री, स्कूल हादसे की वजह बताई; तस्वीरें
Jhalawar School Collapse: राजस्थान में स्कूल की छत गिरने से सात बच्चों की मौत के अगले दिन शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के स्वागत की तस्वीरे सामने आईं। इन तस्वीरों को देखकर लोगों और कांग्रेस ने नाराजगी जाहिर की।
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कांग्रेस ने मंत्री दिलावर पर बोला हमला
ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा भाजपा नेतृत्व संवेदनहीनता की हदें पार कर चुका है।
कांग्रेस ने भी मंत्री दिलावर पर हमला बोला है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कांग्रेस ने पोस्ट करते हुए लिखा- ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा भाजपा नेतृत्व संवेदनहीनता की हदें पार कर चुका है। जहां एक ओर झालावाड़ में सरकारी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण स्कूल की छत गिरने से सात मासूम बच्चों की चिताएं जल रही थीं। वहीं, दूसरी ओर भरतपुर में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ढोल-नगाड़ों और फूलों की वर्षा के बीच भव्य स्वागत में व्यस्त थे। इस भीषण त्रासदी के महज 30 घंटे बाद शिक्षा मंत्री का यह बर्ताव न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि पूरे राजस्थान की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला भी है।
जहाँ एक ओर झालावाड़ में सरकारी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण स्कूल की छत गिरने से सात मासूम बच्चों की चिताएं जल रही थीं, वहीं दूसरी ओर भरतपुर में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ढोल-नगाड़ों और… pic.twitter.com/wfPsZX7bZE
स्वागत विवाद पर क्या बोले मंत्री दिलावर
भरतपुर स्वागत विवाद को लेकर किए गए सवाल के जवाब में मंत्री दिलावर ने कहा- मैंने कहीं भी स्वागत का आग्रह नहीं किया। लोगों ने किया, लेकिन मैंने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया। आप सबको पता है मैं 36 साल से माला नहीं पहनता।
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हादसे पर मंत्री बोले- मैं जिम्मेदारी लेता हूं
स्कूल शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्कूल हादसे की नैतिक जिम्मेदारी ली है। उन्होंने प्रदेश के जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कार्य में तेजी लाने और निगरानी का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि हादसे वाला स्कूल उन जर्जर भवनों की सूची में शामिल नहीं था, जो मरम्मत के लिए मंत्रालय को भेजी गई थी। इसी कारण यह चूक हुई। इस स्कूल की एक साल पहले 1 लाख रुपये में मरम्मत भी कराई गई थी, लेकिन दीवारें जर्जर थीं, जिसके चलते यह हादसा हो गया। जब विभाग में अच्छा काम होता है, तो मैं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। जब दुखद घटना होती है, तो वह भी मेरी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पिछले साल 82 करोड़ रुपये स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए स्वीकृत किए गए थे, जबकि इस साल यह राशि बढ़ाकर 175 करोड़ रुपये कर दी गई है। असुरक्षित स्कूल भवनों की मरम्मत अब प्राथमिकता के साथ की जाएगी और उसकी सतत निगरानी भी की जाएगी।
केंद्र ने राज्यों के लिए जारी किए निर्देश
घटना के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूलों और बच्चों से जुड़ी सभी सुविधाओं का अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट कराएं। छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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