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कृषि कानून: भाषण के बाद किसान नेता दातार सिंह की मौत, आतंकियों ने की थी भाई की हत्या, जानें- पूरी कहानी

Mon, 22 Feb 2021 03:34 PM IST
निवेदिता वर्मा अशोक नीर, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
अशोक नीर, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 22 Feb 2021 03:34 PM IST
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Punjab : Master datar singh fought for farmers rights all his life
मास्टर दातार सिंह। - फोटो : फाइल फोटो

अमृतसर में रविवार को सेमिनार को संबोधित करते समय जान गंवाने वाले मास्टर दातार सिंह जीवन भर किसानों और मजदूरों के हक के लिए आवाज उठाते रहे। उनकी मौत भी इनका हक मांगने के बाद ही हुई। दातार सिंह की मौत के बाद अमृतसर में ये चर्चा आम थी। सोमवार को दिन भर उनके आवास पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा।

Punjab : Master datar singh fought for farmers rights all his life
दातार सिंह के घर सोमवार को लोगों का आना जाना लगा रहा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

रविवार को मौत से पहले कीरती किसान यूनियन के अध्यक्ष दातार सिंह की सेमिनार के मंच संचालक भूपिंदर संधू से नोकझोंक भी हुई थी। दरअसल भूपिंदर संधू ने जब मास्टर दातार सिंह को मंच पर अपना भाषण देने के लिए आमंत्रित किया तो संधू ने कहा मास्टर जी, समय कम है, अपना भाषण 10-15 मिनट में खत्म कर देना। मंच पर पहुंचे मास्टर दातार सिंह ने संधू से मुखातिब होकर मजाक में कहा, मेरे भाषण के लिए कोई समय सीमा तय न की जाए। या तो बोलने का खुला समय दिया जाए या न बुलाया जाए। दातार सिंह के इस अंदाज पर उपस्थित सभी किसान ठहाके मारकर हंसे थे। उसके बाद दातार सिंह ने अपना भाषण 13 मिनट में खत्म कर दिया। भाषण खत्म करने के बाद उन्होंने कहा, अलविदा मित्रों, मेरा समय खत्म हो गया है, संधू मंच संभाल अगली कार्रवाई शुरू करें। इसके बाद वह अपनी कुर्सी पर बैठ गए और कुछ ही देर में उनकी जान चली गई।  

Punjab : Master datar singh fought for farmers rights all his life
मास्टर दातार सिंह। - फोटो : फाइल फोटो

40 साल से दातार सिंह के साथ काम करने वाले भूपिंदर संधू बताते हैं कि दातार सिंह सीमावर्ती गांव घरिंडी में आजादी के एक वर्ष पहले पैदा हुए थे। उन्होंने खालसा कॉलेज अमृतसर से एमए किया और सरकारी अध्यापक रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अध्यापकों की मांगों को लेकर कई आंदोलन शुरू किए। वामपंथी विचारधारा के दातार सिंह ने अध्यापकों की अगुवाई करने के लिए पहले डेमोक्रेटिक टीचर यूनियन और बाद में डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट की स्थापना की। वह जीवन भर इन संस्थाओं के अध्यक्ष निर्वाचित होते रहे।

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Punjab : Master datar singh fought for farmers rights all his life
बच्चों के विदेश से लौटने के बाद होगा दातार सिंह का अंतिम संस्कार। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

दातार सिंह के एक भाई धनवंत सिंह की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। उनका दूसरा भाई अमृतसर कचहरी में कार्यरत है। दातार सिंह की एक बेटी व बेटा इस समय ऑस्ट्रेलिया में हैं। मंगलवार को उनके अमृतसर पहुंचने के बाद दातार सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

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Punjab : Master datar singh fought for farmers rights all his life
मास्टर दातार सिंह। - फोटो : फाइल फोटो

दातार सिंह की पत्नी बीबी अमरजीत कौर भी सरकारी अध्यापक रही हैं और उनके संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देती रही हैं। रिटायर होने के बाद वह किसानों के कल्याण के लिए काम करने लगे थे। उन्होंने कीरती किसान यूनियन का गठन कर किसानों के कई आंदोलनों की अगुवाई की। नए कृषि कानूनों के विरुद्ध वह बहुत ही मुखर थे।  

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