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सिख इतिहास को समझाने के लिए स्कूटर मैकेनिक ने बना डाला म्यूजियम, बिना ट्रेनिंग सच किया सपना
Wed, 13 Jan 2021 04:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
अमित शर्सा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
अमित शर्सा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 13 Jan 2021 04:50 PM IST
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पंजाब के मोहाली में बना सिख म्यूजियम।
- फोटो : अमर उजाला
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युवा पीढ़ी को अपने सिख इतिहास और संस्कृति से जोड़ने के लिए पंजाब के एक मैकेनिक ने अनोखा प्रयास किया है। मोहाली के परविंदर सिंह पेशे से स्कूटर मैकैनिक हैं लेकिन अपनी संस्कृति से उन्हें इतना लगाव है कि उन्होंने एक म्यूजियम ही बना डाला। हालांकि उन्होंने म्यूजियम बनाने के लिए कोई ट्रेनिंग नहीं ली है।
सिख म्यूजियम।
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब की कई फिल्मों और गानों में भी इस म्यूजियम की झलक मिलती है। मोहाली के पीसीएल बलौंगी रोड पर श्मशान घाट के पास यह म्यूजियम सिख अजायब घर के नाम से स्थित है। परविंदर सिंह बताते हैं कि उनका पेशा इस काम से बिल्कुल अलग था लेकिन उन्होंने युवा पीढ़ी को अपने सिख इतिहास और संस्कृति से जोड़ने के लिए यह काम शुरू किया था। पहले उन्होंने एक दो मॉडल बनाए। इसके बाद कई गुरुद्वारों में मॉडल स्थापित किए। इसके बाद पहले लखनौर में उन्होंने यह म्यूजियम स्थापित किया था। इसके बाद अब बलौंगी में स्थापित किया है। स्थायी जगह न मिल पाने से थोड़ी दिक्कत आ रही है। हालांकि वह अपनी पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।
परविंदर सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
परविंदर सिंह बताते हैं कि लाइव प्रतिमाएं तैयार करने के लिए उन्होंने काफी रिसर्च वर्क किया है। वह कई धार्मिक स्थलों पर गए। सिख धर्म से जुड़ा इतिहास पढ़ा। फिर इस संबंध में विद्वानों से चर्चा की। कई पुरानी पेंटिंग देखी। इसके बाद प्रतिमाओं को तैयार करने की दिशा में काम शुरू हुआ। ऐसे में एक प्रतिमा तैयार करने में सात से आठ महीने का समय लग जाता है। परविंदर सिंह बताते हैं कि उन्होंने जो प्रतिमाएं तैयार की हैं। वह 300 से 500 साल पुराने इतिहास से संबंधित हैं। सबसे ज्यादा प्रतिमाएं उस समय की हैं जब औरंगजेब भारतीयों पर अत्याचार कर रहा था। इस दौरान सिखों ने किस तरह अपनी कुर्बानियां दी थी, इस चीज को बड़े ही बखूबी दिखाई गया है।
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मोहाली में बने सिख संग्रहालय में लगी प्रतिमाएं।
- फोटो : अमर उजाला
इन वीर सपूतों की प्रतिमाएं हैं म्यूजियम में
पहले परविंदर ने सिख इतिहास से जुड़ी ही प्रतिमाएं बनाई थीं। अब वह देश के लिए कुर्बानियां देने वाले वीर सपूतों को भी अपने म्यूजियम में जगह देंगे। चाहे वह देश के किसी भी हिस्से से हों। अब तक म्यूजियम में मुख्य रूप से शहीद ऊधम सिंह, हरि सिंह नलवा, बचित्र सिंह, पानी पिलाते हुए भाई कन्हैया, बंदा सिंह बहादुर, छोटे साहिबजादे, महाराजा रणजीत सिंह, भाई तारू सिंह, भाई मति दास जी समेत सौ से अधिक प्रतिमाएं हैं।
पहले परविंदर ने सिख इतिहास से जुड़ी ही प्रतिमाएं बनाई थीं। अब वह देश के लिए कुर्बानियां देने वाले वीर सपूतों को भी अपने म्यूजियम में जगह देंगे। चाहे वह देश के किसी भी हिस्से से हों। अब तक म्यूजियम में मुख्य रूप से शहीद ऊधम सिंह, हरि सिंह नलवा, बचित्र सिंह, पानी पिलाते हुए भाई कन्हैया, बंदा सिंह बहादुर, छोटे साहिबजादे, महाराजा रणजीत सिंह, भाई तारू सिंह, भाई मति दास जी समेत सौ से अधिक प्रतिमाएं हैं।
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सिख संग्रहालय में लगी मूर्तियां।
- फोटो : अमर उजाला
मैडम तुसाद म्यूजियम की तरह मोम की होंगी मूर्तियां
परविंदर बताते हैं कि अभी तक उन्हें सरकार या एसजीपीसी से कोई मदद नहीं मिली है। हालांकि कई बार राजनीतिक नेताओं ने उन्हें सहयोग देने का वायदा किया। उनका सपना है कि वह लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम की तरह अपने म्यूजियम में मोम की प्रतिमाएं लगाएं। उन्होंने अपने म्यूजियम का एक मॉडल बनाया है जिसमें सात मंजिल होंगी। नीचे पार्किंग होगी और ऊपर वर्कशॉप। इसके बाद मॉडलों को उसमें डिस्प्ले किया जाएगा।
परविंदर बताते हैं कि अभी तक उन्हें सरकार या एसजीपीसी से कोई मदद नहीं मिली है। हालांकि कई बार राजनीतिक नेताओं ने उन्हें सहयोग देने का वायदा किया। उनका सपना है कि वह लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम की तरह अपने म्यूजियम में मोम की प्रतिमाएं लगाएं। उन्होंने अपने म्यूजियम का एक मॉडल बनाया है जिसमें सात मंजिल होंगी। नीचे पार्किंग होगी और ऊपर वर्कशॉप। इसके बाद मॉडलों को उसमें डिस्प्ले किया जाएगा।