बॉलीवुड फिल्म पिपली लाइव के सह-निर्देशक महमूद फारूखी को विदेशी शोधकर्ता से दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। अदालत ने उनको निचली अदालत से दी गई सात वर्ष कैद की सजा संबंधी फैसले को खारिज कर दिया। उन पर आरोप था कि शराब के नशे में उन्होंने विदेशी महिला से दुष्कर्म किया।
न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने अपने फैसले में कहा कि अमरीकी महिला शोधकर्ता द्वारा महमूद फारूखी पर लगाए गए दुष्कर्म के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि रिलेशनशिप में जब लोग एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं तो उनके बीच ऐसा हो जाता है, इसका मतलब यह नहीं कि महिला के साथ दुष्कर्म हुआ और महिला के बयान भी विश्वसनीय नहीं लग रहे।
अदालत ने कहा जब महिला के बयान ही संदेह के दायरे में है तो ऐसे में आरोपी को सजा कैसे दी जा सकती है और वह संदेह का लाभ पाने का हकदार है। ऐसे में वे निचली अदालत द्वारा सजा संबंधी फैसले को रदद् करते है। इस मामले में अदालत ने एक सितम्बर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
पुलिस ने दलील दी कि महमूद फारूखी ने मार्च 2015 में साउथ दिल्ली स्थित अपने घर में शिकायतकर्ता के साथ दुष्कर्म किया। इसके साथ ही कहा गया कि आरोपी पीड़िता के साथ रिलेशनशिप में था। इस मामले में 15 जून को एफआईआर दर्ज हुई थी और 29 जून को फारूखी को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस द्वारा दायर आरोपपत्र के आधार पर निचली अदालत ने फारूखी को 4 अगस्त को सात साल की सजा सुनाई थी। फारूखी सजा मिलने के बाद से ही जेल में है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि अमरीकी महिला द्वारा उनके मुव्वकिल पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। महिला दुष्कर्म का आरोप लगाकर 50 हजार रुपए की मांग की थी।