जैसा कि नाम से स्पष्ट है, भस्म आरती के दौरान भस्म यानी राख से भगवान महाकाल के ज्योतिर्लिंग की आरती की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव को "श्मशान के साधक" के रूप में भी देखा जाता है, और भस्म को उनका "श्रृंगार" भी कहा गया है। जिस भस्म से महाकालेश्वर की आरती की जाती है, उसे गाय के गोबर से बने उपले को जलाकर तैयार किया जाता है। किंवदंतियों के मुताबिक, वर्षों पहले महाकालेश्वर की आरती के लिए जिस भस्म का इस्तेमाल किया जाता था, वह श्मशान से लाई जाती थी। हालांकि, मंदिर के मौजूदा पुजारी इस बात को खारिज करते हैं। भस्म आरती की प्रक्रिया करीब दो घंटे चलती है। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाकालेश्वर का पूजन और श्रृंगार किया जाता है। प्रक्रिया के अंत में भगवान शिव को भस्म अर्पित करके उनकी आरती गाई जाती है। इस दौरान घंटे की नाद और महाकाल की भक्ति में डूबे लोगों के सामूहिक स्वर में आरती गाने से माहौल बेहद भक्तिमय हो जाता है।
Mahakaleshwar Temple: ऐसी आरती जिसमे राख से होता है बाबा महाकाल का श्रृंगार, 'श्मशान के साधक' के रूप में पूजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 12 Dec 2024 08:52 AM IST
सार
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव को "श्मशान के साधक" के रूप में भी देखा जाता है और भस्म को उनका "श्रृंगार" भी कहा गया है। जिस भस्म से महाकालेश्वर की आरती की जाती है, उसे गाय के गोबर से बने उपले को जलाकर तैयार किया जाता है।
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