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मानसून की बेरुखी: अलनीनो का असर फीका कर सकता है सितंबर, 72 साल पहले इस माह में इंदौर में 30 इंच वर्षा हुई थी

Mon, 31 Aug 2026 07:14 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 31 Aug 2026 07:14 PM IST
सार

इंदौर और मालवा-निमाड़ में इस बार मानसून कमजोर रहा। 2026 के सावन में महज 2.96 इंच बारिश हुई, जबकि अगस्त भी बेहद कम वर्षा वाला रहा। हालांकि सितंबर में अच्छी बारिश की उम्मीद बनी हुई है। 1954 में सितंबर में रिकॉर्ड 30.2 इंच बारिश हुई थी। कम बारिश से जल संकट की चिंता बढ़ी है।

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इंदौर में कम वर्षा से चिंता बढ़ती जा रही है। - फोटो : अमर उजाला
इस बार इंदौर समेत मालवा-निमाड़ से मानसून की बेरुखी से चिंता गहरा रही है। भारतीय पंचाग का सावन माह पिछले पांच साल में सबसे कम वर्षा वाला रहा तो अंग्रेजी माह के अनुसार अगस्त में 100 साल की सबसे कम बरसात हुई। 28 अगस्त को सावन मास खत्म हो चुका है। इस दौरान रिमझिम और घनघोर बारिश के बजाए इस पूरे माह बूंदाबांदी व मध्यम वर्षा से ही मालवावासियों को संतोष करना पड़ा। सोमवार को अगस्त भी अलविदा हो गया और माह का अंतिम दिन भी क्षेत्र में सूखा बीता। हालांकि, अभी निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सितंबर यानी भादौ पूरा बचा है और इसमें भी झमाझम बारिश होती रही है। सितंबर में 72 साल पहले 30 इंच वर्षा हुई थी, जिसने सारी कमी पूरी कर दी थी। 


लोक मान्यता के अनुसार वर्षा के देवता इंद्र इस वर्ष मालवा-निमाड़ से नाराज हैं। हालांकि, वर्षा काल शुरू होने के पूर्व से ही मौसम वैज्ञानिक और विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने इस बार वैश्विक मौसम को प्रभावित करने वाले अल नीनो प्रभाव मजबूत होने और भारत के मध्य क्षेत्र में वर्षा कम होने की आशंका प्रकट कर दी थी। इंदौर में सावन ऐसे बीता कि यह अहसास ही नहीं हुआ कि वर्षाकाल और सावन माह चल रहा है। तमाम कवियों की सावन की कल्पना और फिल्मी गीतों में सावन के मौसम की खुशियां और महाकवि कालिदास के ऋतु वर्णन में सावन की बरसात का सुंदर चित्रण है, लेकिन इस बार वह बौना साबित हो गया। सावन आया तो, लेकिन लगभग सूखा बीत गया। 

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इंदौर मानसून: ऐसे बरसा पांच साल में सावन - फोटो : अमर उजाला
तीन इंच से भी कम वर्षा हुई
सावन का महीना अच्छी बारिश के लिए जाना जाता है, लेकिन यह फीका रहा। पांच साल के सावन में बारिश  के आंकड़े देखें तो इस वर्ष सबसे कम बारिश हुई है। इससे पहले वर्ष 2022 में 19.6 इंच, 2023 में 19 इंच, 2024 में 7.8 इंच, 2025 में 5.4 इंच और इस वर्ष 2026 में मात्र 2.96 इंच (75.2 मिमी) बारिश हुई। गौर करने वाली बात यह भी है कि 2024 से ही सावन में वर्षा कम हो रही है।

अगस्त 1944 में हुई थी 27 इंच वर्षा
अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक अगस्त माह अच्छी बारिश के लिए याद किया जाता है। वर्षाकाल में अगस्त पर बारिश का बड़ा दारोमदार रहता है। इस माह की औसत वर्षा 258.2 मिमी (10.2 इंच) है। इस माह में सर्वाधिक मासिक वर्षा 707.01 मिमी (27.8 इंच) वर्ष 1944 में दर्ज की गई थी और 24 घंटे में सर्वाधिक वर्षा 263.4 मिमी (10.4 इंच)  22 अगस्त 2020 को दर्ज की गई थी। पिछले एक दशक में अगस्त माह में सबसे कम वर्षा 68.9 मिमी (2.7 इंच) वर्ष 2023 में दर्ज की गई थी। पिछले 100 वर्ष में अगस्त में तीन इंच या इससे कम बारिश होने का यह दूसरा अवसर है। वर्ष 2023 में अगस्त माह में 68.9 मिमी (2.7 इंच) बारिश ही दर्ज की गई थी। इससे पूर्व अगस्त 1956 में 84.6 मिमी (3.3 इंच) बारिश दर्ज की गई थी।  

 
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अगस्त में बारिश के आंकड़े - फोटो : अमर उजाला
सितंबर 1954 में हुई थी 30.3 इंच वर्षा 
मानसून आमतौर पर सितंबर महीने में विदा हो जाता है। इस माह में औसत बारिश 167.2 मिमी (6.6 इंच) होती है। हालांकि, सितंबर में सर्वाधिक वर्षा 1954 में 766.8 मिमी (30.2 इंच) बारिश हुई थी। इस माह 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 20 सितंबर 1962 को 169.8 मिमी (6.7 इंच) का है। पिछले 100 वर्ष के बारिश के रिकॉर्ड को देखें तो अगस्त महीने में वर्ष 2023 में सबसे कम बारिश 2.7  इंच दर्ज की गई थी, लेकिन इसी वर्ष सितंबर महीने में 20.3 इंच बारिश ने 2023 में बारिश की कमी को पूरा कर दिया था।

यह कह रहे हैं पर्यावरणविद 
पर्यावरणविद सिद्धार्थ जैन का कहना है कि आज से चार दशक पूर्व ग्लोबल वार्मिंग की बात अजूबा लगती थी, लेकिन अब संपूर्ण विश्व में मौसम के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पहाड़ों पर हो रही त्रासदी, पिघलते बर्फ के ग्लेशियर, विकास के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई ये सब पहलु मौसम के परिवर्तन की वजह हो सकते हैं।

तालाब और कुएं बावड़ी खाली
इस साल अल्प बारिश से तालाबों का जल स्तर काफी कम है। कुएं, बावड़ियों और बोरिंगों को अच्छी बारिश का इंतजार है। शहर में नगर निगम अभी भी 450 से अधिक टैंकरों से जल वितरण कर रहा है। यदि यही हाल रहा तो इस वर्ष गर्मी में इंदौर समेत पूरे मालवा निमाड़ में गंभीर जल संकट देखने को मिल सकता है। 
 
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