भाजपा में मचे बवाल के बाद अब अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है। भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष को पहले कारण बताओ नोटिस दिया गया और उसके बाद पद मुक्त कर दिया गया। इस मामले में अन्य लोगों पर भी संगठन नजर रख रहा है।
बता दें कि मंगलवार को भाजयुमो की कार्यकारिणी घोषित हुई थी। इसमें जिला उपाध्यक्ष बनाए गए पवन सैंधव ने आपत्ति जताई थी। सैंधव ने फेसबुक पर पोस्ट की थी जिसमें भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव खंडेलवाल पर तानाशाही के आरोप लगाए थे। पद छोड़ने की बात कर कहा था कि मैं कार्यकर्ता बनकर काम करूंगा। इतना ही नहीं कार्यकारिणी में जिन लोगों को जगह मिली उन सबके नाम लिखकर कहा कि मोदीजी परिवारवाद का विरोध कर रहे लेकिन यहां परिवारवाद हावी है। अधिकतर नेता पुत्रों का जगह दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा में हड़कंप मच गया। संगठन के मुखिया का पहली बार इस तरह खुलेआम विरोध किया गया, जिस कारण गुटबाजी और अंतर्कलह भी सामने आई। इसके बाद बुधवार को पवन सैंधव को कारण बताओ नोटिस दिया और उसके बाद पद से मुक्त कर दिया। उनके कार्य को अनुशासनहीनता माना गया।
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भाजयुमो जिलाध्यक्ष ने पत्र जारी कर किया पदमुक्त
- फोटो : सोशल मीडिया
पर्दे के पीछे बड़े नेताओं का हाथ
सूत्रों का कहना है कि इस मामले में पर्दे के पीछे भाजपा के दूसरे नेता हैं। जिलाध्य़क्ष से पटरी नहीं बैठने के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। खातेगांव और सोनकच्छ क्षेत्र के नेताओं का नाम इसमें सामने आ रहा है क्योंकि खातेगांव के कुछ बड़े नेता भाजयुमो जिलाध्यक्ष राम सोनी की नियुक्ति से नाखुश हैं और सोनकच्छ क्षेत्र के एक नेता भी अपने समर्थक को महामंत्री न बनाए जाने से नाराज हैं। इसके चलते यह सब हुआ है। इस मामले में अब उन कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है जिन्होंने फेसबुक पोस्ट को शेयर किया और उस पर कमेंट किए हैं। आने वाले दिनों में ऐसे लोगों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। जिलाध्यक्ष राजीव खंडेलवाल ने बताया कि सभी के समन्वय से कार्यकारिणी बनाई गई है।