मंडला के कान्हा नेशनल टाइगर पार्क के पास मोहगांव प्रोजेक्ट डिविजन में दो साल की बाघिन का शव मिला है। जांच में पता चला कि घास की वजह से बाघिन के दिल में चोट आई थी। इससे उसे इंफेक्शन हुआ और यह ही मौत का कारण बना। यह बहुत ही दुर्लभ मामला है।
2 of 3
मोहगांव प्रोजेक्ट के क्षेत्र में ही बाघिन का शव बरामद हुआ था।
- फोटो : सोशल मीडिया
राज्य सरकार के वन विकास निगम मोहगांव प्रोजेक्ट के डिविजनल मैनेजर राकेश कोपड़े ने बताया कि बाघिन के शरीर में 10 इंच की घास मिली है। इस इलाके में बाघिन के मूवमेंट की जानकारी मिली थी। निगम के चौकीदार ने मंगलवार सुबह 10 बजे ही अपने अधिकारियों को इस युवा बाघिन की मौत होने की सूचना दी। जब अधिकारी वहां पहुंचे तो उन्हें शव बरामद हुआ। शुरुआती जांच में उन्हें लगा कि यह कोई तीर हो सकता है। बाद में पता चला कि वह एक दुर्लभ स्थानीय घास है।
3 of 3
मंडला के जंगलों में उगने वाली टाइगर ग्रास, जिसे झाड़ू घास भी कहते हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
एक अधिकारी ने बताया कि इस घास को स्थानीय लोग कथई कहते हैं, जिसे आम तौर पर टाइगर ग्रास या फूलझाड़ू घास भी कहते हैं। इसका इस्तेमाल आम तौर पर झाड़ू बनाने में होता है। इसका बॉटेनिकल नाम Thysanolaena है। अधिकारियों का अनुमान है कि बाघिन ने जब छलांग लगाई होगी तब घास के नुकीला सिरे से उसे चोट लगी होगी। चोट करीब दस दिन पुरानी है। चोट की वजह से बाघिन कुछ खा नहीं पा रही थी। उसका पेट भी पूरी तरह खाली मिला है। इंफेक्शन की वजह से उसकी मौत हो गई। उसके सभी अन्य अंग यथावत थे। इससे शिकार की आशंका नहीं बनती। एनटीसीए की गाइडलाइन का पालन करते हुए लाश का अंतिम संस्कार किया गया। मंडला में इस महीने में अब तक तीन बाघों की मौत हुई है।