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छतरपुर में इंसानियत शर्मसार: शव ले जाने परिजन जिला अस्पताल के गेट पर करते रहे प्रयास, मदद की जगह वीडियो बनाते रहे लोग

Fri, 18 Mar 2022 12:31 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 18 Mar 2022 12:31 PM IST
सार

छतरपुर जिला अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां शव वाहन से इंतजार में शव अस्पताल के गेट में रखे-रखे अकड़ गया, लेकिन उसे शव वाहन नसीब नहीं हुआ। वहीं लोग मदद की जगह वीडियो बनाते रहे।

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Chhatarpur: Even after hours of death the dead body was not found carrying, the private ambulance driver brought it home for free
मौत के घंटों बाद भी नहीं मिला शव वाहन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
छतरपुर जिला अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां शव वाहन के इंतजार में शव अस्पताल के गेट में रखे-रखे अकड़ गया, लेकिन उसे मौत के 5 घंटे बाद भी शव वाहन नसीब नहीं हुआ। वहीं लोग मदद की जगह वीडियो बनाते रहे। जब काफी प्रयासों के बाद परिजनों को शव ले जाने के लिए वाहन नहीं मिला तो उन्होंने मृतक को बाइक से ले जाने की कोशिश की, जिसे देखकर एक निजी एंबुलेंस चालक ने मानवता का परिचय दिया और शव को नि:शुल्क घर तक पहुंचाया।


जानकारी के अनुसार छतरपुर जिला अस्पताल में बमीठा थाना क्षेत्र शांति नगर कॉलोनी निवासी 20 वर्षीय शंकर लाल रैकवार (पिता बाबूलाल रैकवार) के बीमार होने पर उसके भाई अशोक रैकवार और भाभी पूजा रैकवार ने गुरुवार दोपहर 2:00 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान युवक की करीब 6:05 बजे मौत हो गई। 
Chhatarpur: Even after hours of death the dead body was not found carrying, the private ambulance driver brought it home for free
शव के हाथ बांधकर बाइक से जाते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
परिजनों ने युवक की मौत के बाद शव को घर ले जाने के लिए शव वाहन पाने का प्रयास किया लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें शव वाहन नहीं मिल सका। उन्होंने डायल 100, डायल 108, CM हेल्पलाइन सहित CMHO तक से शव वाहन उपलब्ध कराने की विनती की लेकिन उन्हें कहीं से भी किसी तरह की कोई सहायता नहीं मिली। मौत के बाद काफी घंटे बीत जाने के चलते युवक का शव अकड़ गया।

जब रात 11 बजे तक शव वाहन नहीं मिला तो मृतक के परिजनों ने शव को बाइक में रखकर हाथ बांधकर ले जाने की कोशिश की। लेकिन शव अकड़ जाने से उसके पैर जमीन से टकराने लगे। करीब 5 घंटे तक शव जिला अस्पताल के गेट पर ही रखा रहा। इस दौरान वहां भीड़ एकत्रित हो गई। लोग शव का वीडियो बनाते रहे लेकिन मदद के लिए आगे नहीं आए। 
जब इस घटना की जानकारी एक निजी एंबुलेंस चालक नईम खान को मिली तो उन्होंने मानवीयता का परिचय दिया और शव को नि:शुल्क एंबुलेंस से घर तक पहुंचाया। परिजनों के मुताबिक उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है वे न तो प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज कराने में सक्षम हैं न ही शव को किसी निजी वाहन में घर ले जाने के पैसे उनके पास थे।
Chhatarpur: Even after hours of death the dead body was not found carrying, the private ambulance driver brought it home for free
निजी एंबुलेंस चालक ने मानवता का परिचय दिया और शव को घर तक छोड़ा। - फोटो : अमर उजाला
मामले में जब छतरपुर सीएमएचओ डॉक्टर लखन तिवारी से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि मृतक के भाई का शव वाहन के लिए फोन आया था, मैंने उसे समर्पण क्लब में वाहन के लिए संपर्क करने कहा था। वहीं, CMHO ने बेतुका बयान देते हुए कहा कि शव को सुबह भी ले जाया जा सकता था, पर देर रात ही ले जाना समझ से परे है।

समर्पण क्लब में दो शव वाहन होने के बावजूद भी शव को वाहन मिल पाना जिला अस्पताल में हुई लापरवाही की इंतहा है। जिला अस्पताल में इससे पहले भी कई बार लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं लाख प्रयासों के बाद भी यहां के हालात नहीं सुधर रहे हैं। 
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