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भोपाल: सेंट्रल जेल के कैदियों को पुजारी बनाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण, अवसाद और आक्रामकता से उबारने की पहल

Sun, 20 Mar 2022 12:56 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Sun, 20 Mar 2022 12:56 PM IST
सार

भोपाल की जेल में बंदियों को अवसाद और आक्रामकता से उबारने के लिए नई पहल की जा रही है। कैदियों को सेंट्रल जेल में पुजारी बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं।

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Bhopal: New initiative to rescue prisoners from depression and aggression, training is being given to become priests in Central Jail
सेंट्रल जेल में बंदियों को प्रशिक्षित करते गायत्री परिवार के सदस्य। - फोटो : ANI
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सेंट्रल जेल में बंदियों को अवसाद से बचाने और सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित करने के लिए गायत्री शक्तिपीठ द्वारा पुजारी बनने और विभिन्न पारंपरिक अनुष्ठान करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना और अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जीने के प्रति प्रेरित करना है। 
Bhopal: New initiative to rescue prisoners from depression and aggression, training is being given to become priests in Central Jail
सेंट्रल जेल भोपाल। - फोटो : ANI
इस बारे में जेल अधीक्षक दिनेश नरगवे ने बताया कि जेलों के कैदी या तो अवसाद में हैं या आक्रामकता में हैं। उनमें से अधिकांश अर्धसाक्षर और गरीब हैं। हमने कैदियों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता महसूस की ताकि वे अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा महसूस करें। सीखने के इच्छुक 50-60 कैदियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
Bhopal: New initiative to rescue prisoners from depression and aggression, training is being given to become priests in Central Jail
पारंपरिक अनुष्ठानों के प्रशिक्षण से कैदियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है। - फोटो : ANI
वहीं सेंट्रल जेल में बंद एक कैदी  संदीप ने बताया कि मुझे हत्या के आरोप में कैद किया गया है। हमें आध्यात्मिक शिक्षा और संस्कारों के साथ-साथ प्रेम और सौहार्द के गुणों का प्रचार करना सिखाया जा रहा है। पहले हम तनाव में रहते थे, लेकिन ट्रेनिंग के बाद शांति का अहसास होता है और हम समाज के एक हिस्से की तरह महसूस करते हैं।
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Bhopal: New initiative to rescue prisoners from depression and aggression, training is being given to become priests in Central Jail
प्रशिक्षण के माध्यम से जेल से रिहा होने के बाद बंदी भी एक सामान्य जीवन जी सकेंगे। - फोटो : ANI
बंदियों को प्रशिक्षण देने वाले गायत्री शक्तिपीठ भोपाल के सदस्य सदानंद आंबेकर ने कहा कि हम इन कैदियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं क्योंकि वे समाज से जुड़े हुए हैं। उन्हें अनुष्ठान सिखाया जा रहा है ताकि वे लोगों की भलाई के लिए काम कर सकें। हम चाहते हैं कि वे समाज में एक मानवीय और सदाचारी व्यक्ति के रूप में वापस जाएं।
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