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अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस: खुश रहना जरूरी है इस सोच के साथ MP के 63 हजार आनंदकों ने कोने-कोने में बिखेरी खुशियां

Sun, 20 Mar 2022 07:00 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Sun, 20 Mar 2022 07:00 AM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस: राज्य आनंद संस्थान के 63 हजार आनंदकों ने बांटी खुशियां, लोगों को बताया भौतिक सुख जरूरी नहीं

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International Happiness Day: With this thinking it is important to be happy, 63 thousand enjoyers of MP spread happiness in every corner
अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस - फोटो : सोशल मीडिया
शांत व्यक्ति ही सुखी एवं समृद्ध समाज का निर्माण कर सकता है। बस इसी सोच के साथ मध्य प्रदेश सरकार ने आनंद विभाग के अंतर्गत अगस्त 2016 में राज्य आनंद संस्थान की नींव रखी थी। महज कुछ ही सालों में खुशियों का ये कारवां सफलता की दिशा में बढ़ चला है। खुशियों पर प्रत्येक नागरिक का हक है। इसलिए राज्य के हर नागरिक को खुशियां बांटने की जिम्मेदारी आनंद विभाग ने ली और प्रयास किए। उन छोटे प्रयासों का बड़ा परिणाम मिला। आज मध्य प्रदेश के 63 हजार से ज्यादा आनंदक लोगों में खुशी बांटने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। 

 
International Happiness Day: With this thinking it is important to be happy, 63 thousand enjoyers of MP spread happiness in every corner
खुश रहना सबके लिए जरूरी है। - फोटो : सोशल मीडिया
राज्य के विकास के लिए नागरिकों का खुश रहना जरूरी है
आज जमाना फास्ट-फॉरवर्ड हो चुका है। हर इंसान भौतिक सुख-सुविधाओं की तलाश में दिन रात दौड़ रहा है। वह सब कुछ भूलकर बस आसपास के लोगों से प्रतिस्पर्धा करने में जुटा है और तनाव और अशांति से घिर रहा है। लेकिन किसी राज्य का विकास तब ही संभव है, जब उस राज्य में रहने वाले लोग खुश हों और आनंद से रहें। मध्य प्रदेश सरकार ने इस बात को समझा और गंभीरता से लिया। राज्य आनंद संस्थान सरकार की इसी सोच का नतीजा था। प्रदेश सरकार ने नागरिकों को भौतिक सुख मिलने और उनका जीवन आनंदमयी बनाने के उद्देश्य के साथ राज्य आनंद संस्थान की शुरुआत करने का फैसला लिया। इस संस्थान को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मानना है कि राज्य के विकास में नागरिकों के विचार एवं भावशुद्धि का महत्वपूर्ण योगदान होता है। 
 
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : सोशल मीडिया
भौतिक सुख नहीं आनंद जरूरी है
खुशी की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। दुनिया के बहुत सारे लोग खुशी क्या है यह भी नहीं जानते। लेकिन एक बाद साफ है भीतर की शांति और आनंद सभी चाहते हैं। हालांकि भौतिक सुख और सुविधाओं के पीछे भागना आनंद का घोतक नहीं है। वर्तमान दौर में देखा जाए तो दुनिया में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनके पास भौतिक सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं हैं, लेकिन बावजूद इसके उनका हमेशा खुश रहना संभव नहीं हैं। दरअसल व्यक्ति को खुशी तब मिलती है जब वह मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक रूप से उन्नति करता है। 

संस्थान के 63 हजार से ज्यादा आनंदक लोगों में बिखेर रहे खुशियां 
एक सकारात्मक पहल के साथ शुरू किए गए इस संस्थान को जन भागीदारी का बहुत अच्छा साथ मिला और इससे लोगों की एक विशाल श्रृंखला जुड़ गई। बेहद कम समय में आज राज्य आनंद संस्थान से 63,502 आनंदक (वॉलंटियर्स) जुड़ चुके हैं। ये आनंदक लोगों की भाव शुद्धि करने के साथ-साथ विभिन्न कार्यक्रमों की मदद से उनमें खुशियां बांट रहे हैं। आनंदक के तौर पर शासकीय और अशासकीय व्यक्ति बिना किसी मानदेय के, बिना किसी अपेक्षा के स्वयं सेवी के रूप में काम करते हैं।  
 
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राज्य आनंद संस्थान द्वारा लोगों को खुश रखने के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
छतरपुर से शुरू हुआ आनंद ग्राम कार्यक्रम 
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से  शासन के महत्वाकांक्षी आनंदग्राम कार्यक्रम की शुरुआत कुछ समय पहले हुई है। प्रदेश की ये पहली कार्यशाला जिला कलेक्टर संदीप जीआर के मार्गदर्शन में 2 मार्च को क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र नौगांव से शुरू हुआ। आनंद ग्राम प्रभारी एवं ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर लखनलाल असाटी ने बताया कि कार्यशाला में 50 वॉलंटियर सहित संस्थान के 7 मास्टर ट्रेनर सम्मिलित हुए थे। आनंद विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखिलेश कुमार अर्गल ने बताया कि कार्यशाला इतनी सफल रही कि पूरे राज्य में इसे मॉडल के रूप में देखा जा सकेगा। वहीं प्रतिभागियों ने कहा कि वह कार्यशाला से आनंद बटोर कर अपने गांव में फैलाएंगे और गांव के लिए कुछ अच्छा कर पाएंगे। दरअसल आनंद विभाग का फोकस गांव के सबसे बड़े और सशक्त संसाधन वहां के ग्रामीणों पर है। गांव में उपलब्ध सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग कर लोगों की आंतरिक खुशी बढ़ाई जा सकती है। 
 
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छतरपुर से हाल ही में आनंद ग्राम की शुरुआत की गई। - फोटो : अमर उजाला
राज्य आनंद संस्थान के खास कार्यक्रम 
अल्पविराम- इस कार्यक्रम के जरिए व्यक्ति अपनी आतंरिक कमियों को समझने और सुधारने का अवसर देता है। इस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों, शासकीय तथा सामाजिक निर्वहन में व्यक्ति को सकारात्मक परिवर्तन नजर आता है। अब तक प्रदेशभर में अल्पविराम के 2,300 से ज्यादा कार्यक्रम हो चुके हैं। इन कार्यक्रमों का सफल क्रियान्वयन 400 आनंद सहयोगियों और 51 मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा किया गया। इन कार्यक्रमों से राज्य के लगभग 11,000 प्रतिभागियों को लाभ मिल चुका है।

 
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