फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

बदलाव की मुहिम में बेटे भी बेटियों के साथ, बोले- जो सुविधाएं मुझे वो मेरी बहन को क्यों नहीं

Fri, 28 Dec 2018 07:48 PM IST
kapil sharma अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: kapil sharma Updated Fri, 28 Dec 2018 07:48 PM IST
विज्ञापन
Workshop on Gender Sensitisation of Amar Ujala Aprajita 100 million smiles campaign.
जेंडर सेंसटाइजेशन - फोटो : amar ujala

मुझे सुविधाएं तो मेरी बहन को क्यों नहीं? ये सवाल है उस पीढ़ी का जो नई है। युवा है...। जिसमें जोश है। जज्बा है...। चीजों को अपने नजरिए से देखने, परखने और उसमें बदलाव करने की ललक है। वैसे ये महज सवाल नहीं। बदलाव के प्रति छटपटाहट है...। अकुलाहट है..। भेदभाव के प्रति रोष है...। ...तो ये एक नई उम्मीद भी है। ...और नई बयार भी। जरूरत है हर घर से ये सवाल उठे। तभी बेटा-बेटी में भेदभाव खत्म होगा।



देखो, जो तुम्हे दिखाई नहीं देता...।  सुनो जो तुम्हे सुनाई नहीं देता...। महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव, असमानता और हिंसा ऐसे ही मामले हैं जो सबके सामने होते हैं। जरूरत है कि हम इस पर चुप न रहें। तभी बदलाव आएगा। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली सुरक्षा संस्था की सचिव शालिनी माथुर ने राजाजीपुरम स्थित सेंट एंजनीज इंटर कॉलेज में आयोजित ‘अमर उजाला’ 100 मिलियन स्माइल्स ‘जेंडर सेंसटाइजेशन’ कार्यशाला में छात्र-छात्राओं से ये बातें कहीं। इस मौके पर मनोवैज्ञानिक और काउंसलर डॉ. पीके खत्री ने भी विद्यार्थियों को महिला मुद्दों पर संवेदनशील होने के लिए जागरूक किया। वहीं, छात्रों ने भी भेदभाव पर कई सवाल किए।

Workshop on Gender Sensitisation of Amar Ujala Aprajita 100 million smiles campaign.

अपने हक के लिए करनी होगी आवाज बुलंद
शालिनी माथुर ने विद्यार्थियों से कहा, भारत का संविधान सभी को समानता का अधिकार देता है। अनुच्छेद-14 के अनुसार, जाति, लिंग और वर्ग के आधार पर किसी प्रकार भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद महिलाओं को असमानता का शिकार होना पड़ता है। घर पर भी बेटे और बेटियों में भेद किया जाता है। हालांकि काफी बदलाव आया है। पर, अभी भी इसमें बहुत सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा, शिक्षा, सत्ता और संपत्ति हासिल करके ही महिलाएं सशक्त बन सकती हैं। महिलाओं को इनको हासिल करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

Workshop on Gender Sensitisation of Amar Ujala Aprajita 100 million smiles campaign.
जेंडर सेंसटाइजेशन - फोटो : amar ujala

नारी शक्ति है...बेटियां बनाएं अपनी पहचान
मनौवैज्ञानिक और काउंसलर डॉ. पीके खत्री ने बेटियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, नारी शक्ति है। उसे अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए। भले ही हमारा समाज पुरुष प्रधान हो, पर इंदिरा नूई, सुनीता विलियम्स, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल जैसी महिलाओं ने अपनी अलग पहचान बनाई है। पहले महिलाओं के लिए-नारी तुम अबला हो..... जैसी कविता हुआ करती थी। अब ये- नारी तुम श्रद्धा हो...तक आ पहुंची है। नारी को श्रद्धा के पात्र से अब सशक्तीकरण तक लाना है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Workshop on Gender Sensitisation of Amar Ujala Aprajita 100 million smiles campaign.
- फोटो : amar ujala

बदलनी होगी हर वह सोच जो गैरबराबरी की वजह बनती है
विद्यालय की प्रबंधक तरु सक्सेना ने कहा, महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं। हमें अपनी सोच बदलनी चाहिए। उन्होंने विद्यालय में हुए एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि - सभी विद्यार्थियों को जब किसान का चित्र बनाने को कहा गया तो ज्यादातर ने पुरुष किसान का ही चित्र बनाया। महिलाएं भी तो खेतों में पुरुषों के बराबर काम करती हैं। इसके बावजूद आम धारणा है कि किसान सिर्फ पुरुष ही होते हैं और वही मेहनत करते हैं। तरु सक्सेना ने सभी विद्यार्थियों को इस बदलाव में योगदान के लिए प्रेरित किया।

विज्ञापन
Workshop on Gender Sensitisation of Amar Ujala Aprajita 100 million smiles campaign.
जेंडर सेंसटाइजेशन - फोटो : amar ujala
....क्योंकि ये सवाल भी जरूरी हैं
सवाल उठते हैं तो जवाब आते हैं। समाधान मिलते हैं। कार्यशाला में सवालों का उठना इस बात का संकेत है कि आज के बच्चे अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर हैं। विशेषज्ञों ने न केवल उनके सवालों को सराहा, बल्कि उनके असमंजस को भी दूर किया।

देवर्षि संत ने पूछा, खेल में लड़कियों की संख्या कम है, समाज भी उन्हें हतोत्साहित करता है। कैसे बदली जा सकती है लोगों की सोच?
विशेषज्ञ बोले
: हमें कोशिश किसी की सोच बदलने की नहीं करनी। हमें एक ऐसा माहौल देना है कि लोग खुद सही गलत का फैसला कर सकें। लड़कियों को खुद को साबित करना होगा और आप बच्चों को ही अपने आसपास के लोगों को समझाना होगा, उनसे संवाद कायम करना होगा। ताकि वह हतोत्साहित करने वाली अपनी आदत बदल सकें।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed