गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी की पहचान के लिए गठित एक सदस्यीय जस्टिस विष्णु सहाय आयोग के समक्ष सोमवार को तीन गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए। बयान दर्ज कराने वालों में गुमनामी बाबा के मकान मालिक के बेटे, पत्रकार के साथ बाबा की मरहम-पट्टी करने और दूध पहुंचाने वाले शामिल थे। देखें उन्होंने क्या बताया...
गवाहों ने बताया कि रात के अंधेरे में बाबा से मिलने तत्कालीन डीआईजी भी आते थे। मंगलवार को आयोग के कैंप कार्यालय में आयोग के समक्ष गवाही देने वाले वरिष्ठ पत्रकार राम प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि वह गुमनामी बाबा के निकटतम शिष्य कृष्ण गोपाल श्रीवास्वत के छात्र थे।
वह उनके साकेत कला केंद्र में आईजीडी बांबे के छात्र थे। उनका श्रीवास्तव से निकट का संबंध था। उनसे मिले संकेतों और परिस्थिति जन्य साक्ष्यों का आज तक उन्होंने जो अध्ययन किया है, उससे यह प्रतीत होता है कि गुमनामी बाबा उर्फ भगवनजी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ही थे।
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गुमनामी बाबा का फाइल फोटो
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त्रिपाठी ने न्यायमूर्ति सहाय के सवालों के जवाब में कहा कि वह इस तथ्य को लेकर एक स्मारिका का प्रकाशन कर चुके हैं। दूसरे गवाह गुमनामी बाबा के निजी चिकित्सक डॉ. आरपी मिश्र के नर्सिग होम में कंपाउंडर रहे राम प्रताप यादव थे।
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बहुत से फोटो की पहचान करना मुश्किल है
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उन्होंने आयोग के समक्ष अपने बयान में कहा कि वह न केवल गुमनामी बाबा के पैर के घाव की पट्टी करने के लिए जाते थे, बल्कि उनके यहां दूध भी पहुंचाते थे।