लखनऊ विश्वविद्यालय में सीएम योगी आदित्यनाथ को काले झंडा दिखाने की घटना छात्रों की समस्याओं की लंबे समय से की जा रही अनदेखी का नतीजा है। जिन छात्र-छात्राओं ने काला झंडा दिखाया था उनमें से अधिकांश लविवि में मेस की समस्या, छात्राओं की सुरक्षा सहित कई मुद्दों को लेकर आंदोलनरत रहे हैं। छात्रों ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय जाते समय सीएम योगी का काफिला रोक लिया था और काले झंडे दिखाए थे। कुछ छात्र उनकी गाड़ी के आगे लेट गए थे जिससे कुछ देर तक सीएम का काफिला रुक गया था।
छात्रों ने बताया क्यों रोका था सीएम योगी का काफिला, दिखाए थे काले झंडे
पहले भी घेर चुके हैं विधानसभा
पिछले दिनों जॉइंट एक्शन कमेटी की अगुवाई में ये छात्र-छात्राएं विधानसभा का घेराव भी कर चुके हैं। प्रदर्शन को बड़ा बनाने में इन छात्र-छात्राओं ने बड़ी भूमिका निभाई थी। साथ ही गिरफ्तारी भी दे चुके हैं।
बड़े आंदोलन की दी थी चेतावनी
लविवि में मेस की समस्याओं को लेकर प्रदर्शनकारी इन विद्यार्थियों ने बड़ा प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी। इसे लेकर स्टूडेंट सोशल मीडिया पर भी सक्रिय थे। पूर्व छात्र नेताओं ने भी इन्हें समर्थन दिया था। विद्यार्थियों का दर्द था कि विवि के ही प्रोफेसर डॉ. दिनेश शर्मा उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन मेस व विवि की अन्य समस्याओं को लेकर कभी कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाया।
नोटिस भेजने से भी थे खफा
विवि में गतिविधियों के कारण इन छात्र-छात्राओं को ‘संदिग्ध’ बताकर नोटिस थमाया गया था। ये नोटिस विद्यार्थियों के घर पर भी भेजकर जवाब मांगा गया था।
एबीवीपी को छोड़ सभी छात्र संगठन एक साथ
प्रदर्शन में एबीवीपी को छोड़कर लगभग सभी छात्र संगठनों के पदाधिकारी शामिल थे। इससे पहले भी कई आंदोलनों में ये छात्र संगठन एक साथ एक मंच पर आ चुके हैं।
एबीवीपी को तवज्जो मिलने से भी था आक्रोश
विवि परिसर में समस्याओं को लेकर प्रशासन पर छात्र संगठनों के बीच भेदभाव करने का भी आरोप लगा था। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना था कि समस्याओं का निस्तारण करने के बजाए नोटिस भेज दिया जाता था। जबकि एबीवीपी को बुलाकर बैठक कर समस्याओं को सुना जाता था। यही नहीं, अंबेडकर जयंती कार्यक्रम के लिए गैर एबीवीपी छात्र संगठनों को विवि ने हॉल देने से मना कर दिया था।