उत्तराखंड के पानी और जवानी की गाथा पूरा देश जानता है। अपनी संस्कृति को जानने के लिए ऐसे महोत्सव आयोजन जरूरी हैं। अपनी माटी, संस्कृति और अतीत से कटा व्यक्ति त्रिशंकु हो जाता है, बस यहां-वहां डोलता रहता है। आगे नहीं बढ़ पाता है। आगे बढ़ना है तो त्रिशंकु नहीं बनना है, अपनी परंपराओं संस्कृति से जुड़ा रहना होगा। शुक्रवार को गोमती किनारे पं. गोविंद वल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन में उत्तराखंड महापरिषद की ओर से आयोजित उत्तराखंड महोत्सव के उद्घान में पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्य अतिथि ये बातें कहीं।
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उत्तराखंड महोत्सव
- फोटो : amar ujala
उत्तराखंड के परंपरागत नृत्य प्रस्तुतियों के बीच शुरू हुए 10 दिवसीय उत्तराखंड महोत्सव के विशिष्ट अतिथि थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत रहे। मुख्यमंत्री ने कहा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का बंटवारा राजनीतिक रूप से भले ही हो गया हो, लेकिन सांस्कृतिक रूप से हम एक ही हैं। पहाड़ से आने वाली नदियां उत्तर भारत को ऊर्जावान बनाती हैं। पहाड़ों से पलायन पर चिंता जताते हुए कहा, बीते दो दशकों में 70-80 लाख पलायन के आंकड़े चिंताजनक हैं।
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उत्तराखंड महोत्सव
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कैबिनेट मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, आशुतोष टंडन गोपाल जी समेत महापरिषद के पदाधिकारी मौजूद रहे। महापरिषद की वार्षिक स्मारिका ‘उत्तराखण्ड दर्पण’ का विमोचन भी हुआ।
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समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को पर्वतीय टोपी भी समर्पित की। मेहमानों का स्वागत परंपरगात वेषभूषा और संगीत वादन नृत्य के साथ हुआ परंपरागत वेश भूषा, नथ, पिछौड़ा संग पहाड़ी बोली और पहाड़ी संस्कृतियों में रंगी प्रस्तुतियों संग उत्तराखंड महोत्सव का आगाज हुआ। पंतनगर, विकासनगर, हरिनगर, पीजीआई, गोमतीनगर, खरगापुर, नीलमथा, कल्याणपुर की तीन सौ से अधिक पर्वतीय महिलाओं ने झोड़े की रंगारंग प्रतियोगिता में धमाल मचाने के बाद शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
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उत्तराखंड का प्रसिद्ध झोड़ा-खोल दे माता खोल भवानी धार में किवाड़ा, के लै रैछे भेंट पखोवा पर दर्शकों की तालियां मिली। पर्वतपुत्र हेमवती नेदन बहुगुणा की स्मृतियों पर परिचर्चा, गोष्ठी, चित्रकला प्रतियोगिता हुई, उन पर तैयार लघु फिल्म भी दिखाई गई।