टीवी देखने से मना किया, नहीं मानी और दे दिया तलाक, दहेज में मोटर साइकिल नहीं मिली तो कह दिया तलाक। ऐसे ही छोटे-छोटे मामलों की शिकार राजधानी की महिलाओं ने मोदी सरकार से तीन तलाक खत्म करने की मांग की है। साथ ही इसकी पैरवी करने वाले उलमा से नाराजगी जताई है।
टीवी देखने से मना किया, नहीं मानी तो कह दिया-तलाक, तलाक, तलाक
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बुधवार को बेगमात रायल फैमिली ऑफ अवध के तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम में तीन महिलाओं ने मोदी सरकार से तीन तलाक को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग की है। संगठन की अध्यक्ष फराहना मालिकी ने बताया कि तीन तलाक के सैकड़ों मामलों में ये तीन मामले अभी सप्ताह भर पहले के हैं। तीनों महिलाओं के पतियों ने छोटो-छोटी बातों पर तलाक देकर इनका सुखी संसार उजाड़ दिया।
टीवी देखने पर दिया तलाक
गोमतीनगर की शबनम का निकाह उन्नाव के वजीर से हुआ था। पति को टीवी पर सीरियल देखना पसंद नहीं था। कई बार मना किया। 25 साल गुजर गए और चार बच्चे भी बड़े हो गए, लेकिन एक दिन टीवी देखने पर तीन बार तलाक बोल कर घर से निकाल दिया। शबनम कहती हैं कि तीन तलाक का गलत फायदा उठाने वाले मुल्ला व मौलवी को सबसे पहले सजा देने का प्रावधान किया जाए और तीन तलाक प्रतिबंधित किया जाए। वह इस वक्त अपने बच्चों के साथ बिना पति के रहती हैं।
दहेज में नहीं मिली मोटरसाइकिल तो दिया तलाक
उजरियांव गांव की रहने वाली रेहाना का निकाह अकबरनगर के फिरोज से हुआ। दो माह पहले हुए निकाह के बाद पति का दहेज उत्पीड़न चलता रहा। शुरू में मजाक मजाक में दहेज का ताना दिया गया। बाद में इसे लेकर ससुराल पक्ष सख्त हो गया। मोटर साइकिल की मांग होती रही। एक दिन मारपीट कर घर से निकाल दिया और तीन बार तलाक कह दिया। रेहाना बताती हैं कि दो माह में ही उनके सपने बिखर गए। तीन तलाक को रोका जाना चाहिए।
बेटी जन्मी तो पति ने दिया तलाक
काकोरी की फिरदौस का निकाह मोहम्मद कासिम से हुआ। साल भर में बेटी पैदा होते ही पति व ससुराल पक्ष का रुख बदल गया। पहले मानसिक और शरीरिक उत्पीड़न शुरू हुआ। बाद में पति मोहम्मद कासिम ने एक मौलवी से मिल कर उसे तीन बार तलाक बोल कर बेघर कर दिया। दो साल की मासूम बेटी को लेकर वह दर दर भटकी। कहीं कोई सहारा नहीं मिला। फिरदौस कहती हैं कि तीन तलाक के नाम पर जिंदगी बरबाद करने के लिए शरीयत का गलत फायदा उठाने वालों के खिलाफ सरकार जल्द कार्रवाई करे।