मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखनाथ मंदिर स्थित दुर्गा शक्ति पीठ पर विधि विधान से कलश स्थापना की। इससे पूर्व दुर्गा मंदिर से एक शोभा यात्रा निकली। जिसमें मंदिर के साधु संत और वेदपाठी छात्र शामिल हुए।
साधुओं के हाथ में त्रिशूल तथा विशेष वाद्य यंत्र नागफनी था। जिसे बजाते हुए वे चल रहे थे। भीम सरोवर से कलश में जल भर कर यात्रा वापस मंदिर आई जहां मंत्रोच्चार के साथ कलश को स्थापित किया गया।
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योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ शाम चार बजे गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद अपने बैठक कक्ष में पहुंचे। यहां कुछ अधिकारियों और लोगों से उन्होंने मुलाकात की। इसके बाद वे सीधे कलश स्थापना स्थल पर पहुंचे।
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भीम सरोवर से जल भरने निकले साधु संतों की शोभायात्रा का नेतृत्व मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ कर रहे थे। कलश स्थापना के दौरान संस्कृत विद्यालय के 75 छात्रों एवं अन्य आचार्यों ने मंत्रोच्चार किया। इसके बाद सीएम ने पहले गौरी-गणेश और फिर तमाम देवी-देवताओं की पूजा की। फिर शुरू हुआ सप्तशती का पाठ करीब दो घंटे तक चला।
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नौ दिन ऊपर के कक्ष में रहते थे योगी
परंपराओं का पालन करते हुए योगी आदित्यनाथ शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना के बाद अपने आवास के ऊपरी कक्ष में ही नौ दिन रहते थे। सांसद रहते हुए गोरखपुर में ट्रेन हादसा होने पर एक बार ही वह आकस्मिक परिस्थिति में नीचे उतरे थे।
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हालांकि, सीएम होने के बाद पिछले वर्ष कलश स्थापना के दूसरे दिन वह लखनऊ चले गए थे। इस बार भी वह ऐसा ही करेंगे। ऐसा वह अपने राजधर्म के निर्वहन के लिए करेंगे।