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अजीब है 'बंगला नंबर छह' का रहस्य, यहां रहने वाले नेता-अफसर की जाती है कुर्सी

Tue, 21 Mar 2017 08:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 21 Mar 2017 08:49 AM IST
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superstitious related to bungalow number six in Uttar Pradesh.

यूपी में नई सरकार का गठन हो चुका है। नए मंत्रियों को आवास और कार्यालय आवंटित किए जा रहे हैं। कुछ आवास और कार्यालय ऐसे हैं जिनके साथ अंधविश्वास जुड़ा हुआ है। इसकी चर्चा सियासी गलियारों में भी गूंज रही है।



इसमें मुख्यमंत्री आवास के बगल वाला सरकारी बंगला नंबर 6 कालिदास मार्ग, गौतम पल्ली स्थित 22 नंबर का आवास और विधान भवन स्थित कार्यालय का कक्ष संख्या 58 ऐसा है जिसे लेने में लोग झिझकते हैं।

हालांकि, अधिकारी इसे महज इत्तेफाक मानते हैं। उनका कहना है कि गलत काम करने के कारण अगर कोई सजा पाता है तो इसमें बंगले का क्या दोष?

superstitious related to bungalow number six in Uttar Pradesh.

जो भी यहां रहा, उसका भला नहीं हुआ
कालिदास मार्ग पर बंगला नंबर 6 के साथ कुछ ऐसा संयोग रहा कि जो भी यहां रहा, उसका भला नहीं हो सका। यह बंगला कभी अधिकारियों का ऑफिस हुआ करता था। मुलायम सरकार में मुख्य सचिव रह चुकीं नीरा यादव यहीं रहती थीं। इसी बंगले में रहते उन पर मुसीबतें आनी शुरू हुईं।

नोएडा में प्लॉट आवंटन मामले में उनका नाम आया और जेल तक जाना पड़ा। प्रमुख सचिव परिवार कल्याण रहे प्रदीप शुक्ला भी इस मकान में रह चुके हैं। वह एनआरएचएम घोटाले में फंस गए। बाद में इस बंगले को मंत्रियों या अहम पदों पर बैठे नेताओं के लिए आवंटित किया जाने लगा।

मुलायम सिंह यादव की 2003 में बनी सरकार में अमर सिंह को यह बंगला आवंटित हुआ और वे इसमें रहे भी। मुलायम की सत्ता गई तो वह भी बेदखल हो गए। बाद में अमर सिंह सपा से निकाले गए और तमाम तरह की मुश्किलें उनके सामने आईं।

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कुशवाहा घोटाले में फंसे, वकार बीमार पड़े
बसपा सरकार बनी तो बाबूसिंह कुशवाहा को यह आवास आवंटित हुआ। चार साल तक तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई, लेकिन उसके बाद एनआरएचएम घोटाले में फंसे और जेल तक जाना पड़ा।

बसपा सरकार गई और सपा सरकार में यह बंगला कैबिनेट मंत्री वकार अहमद शाह को दिया गया। वकार छह महीने तक इसमें रहे और उसके बाद बीमार पड़ गए। आज भी वह कोमा में हैं।

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चौधरी ने 24 घंटे में कर दिया था खाली
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बगल का बंगला होने की वजह से तत्कालीन मंत्री राजेंद्र चौधरी ने इसे अपने नाम आवंटित करा लिया। इस आवास में शिफ्ट हुए 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि उनसे एक अहम मंत्रालय छीन लिया गया और वे केवल राजनैतिक पेंशन मंत्री रह गए। राजेंद्र चौधरी ने इसका जिम्मेदार इसी बंगले को माना और 24 घंटे में ही इसे खाली कर दिया।

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चौधरी के बाद यह आवास सीएम के एक अन्य करीबी जावेद आब्दी को मिला। आब्दी जब इसमें आए तो उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन थे। कुछ ही दिन बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। इस बंगले पर अभी तक जावेद आब्दी ही काबिज थे लेकिन नई सरकार में अब यह किसी नए नेता को मिलेगा। ऐसे में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

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