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अपनी कला से बच्चों को नए अंदाज में पढ़ाते हैं एलयू के छात्र रामदास, देते हैं ये सलाह

Sat, 15 Sep 2018 03:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 15 Sep 2018 03:12 PM IST
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student of lucknow university dr. ramdaas teaches children from toys
डॉ. रामदास - फोटो : अमर उजाला

बच्चे जो देखते हैं और महसूस करते हैं उसका उनके दिलो दिमाग पर पुस्तकों से कहीं जल्द असर पड़ता है। चाहे खेल-खेल में पढ़ाना हो या फिर खिलौने से उनके मन मस्तिष्क में रचनात्मकता को जाग्रत करना हो। ऐसे ही काम में जुटे हैं डॉ रामदास, जो गांव में पाए जाने वाले सरकंडे से खिलौने बनाते हैं और बच्चों को बनाना सिखाते हैं। इन खिलौनों के जरिए वह बच्चों को पढ़ाते हैं और उनमें कुछ गढ़ने का हौसला बढ़ाते हैं।

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सरकंडे से वस्तुएं - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र डॉ. रामदास का मानना है छोटे बच्चों को रचनात्मकता के साथ ही किताबी ज्ञान सरकंडे के खिलौने और वस्तुएं बनाकर भी दिया जा सकता है।  छोटे बच्चों को रचनात्मकता के साथ ही किताबी ज्ञान सरकंडे के खिलौने और वस्तुएं बनाकर भी दिया जा सकता है। यह मानना है लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में पोस्ट डॉक्टोरल छात्र डॉ. रामदास का। डॉ. रामदास गांवों में उगने वाले सरकंडे से आकर्षक खिलौने और वस्तुएं बनाकर बच्चों में बांटते हैं।

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सरकंड से बना सामान - फोटो : अमर उजाला
इससे बच्चे सीखने में ज्यादा ध्यान लगाते हैं तथा वे वस्तुएं बनाना भी सीखते हैं। गोसाईंगंज के पिपहर रसूलपुर डिकनमऊ गांव के रहने वाले डॉ. रामदास ने बताया कि ये चीजें उन्होंने बचपन में बनानी सीखीं थीं। बचपन में ये चीजें खूब आकर्षित करती थीं।जाहिर है आज भी बच्चों को ये चीज लुभाएंगी। परास्नातक करने के दौरान असाइनमेंट के दौरान प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के बीच इसको लेकर गया। इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई पड़ा। इसलिए मैंने उन्हें ये खिलौने देने के साथ ही बनाना भी सिखाया। इसके बाद ये सिलसिला चल निकला है। जब भी मौका मिलता है तो फिर बच्चों को ये खिलौने  और वस्तुएं बनाना सिखाता हूं। गांवों ये आसानी से उपलब्ध होता है इसलिए कोई खर्च भी नहीं होता है।
 
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सरकंडे से बना सामान - फोटो : अमर उजाला
प्लास्कि और चाइनीज खिलौनों से रहें दूर
डॉ. रामदास के अनुसार हम लोग चाइनीज और प्लास्टिक के खिलौने लेते हैं। अगर हमारी भारतीय कला को बढ़ावा मिले तो ये खिलौने और वस्तुएं लोगों को उपलब्ध हो सकती हैं। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा तथा लोगा नुकसान से भी बचेंगे।
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डॉ. रामदास - फोटो : अमर उजाला
अभियान चलाकर करेंगे लोगों को जागरुक
डॉ. रामदास सरकंडे से झुनझुना, हाथी, घोड़ा, ऊंट, डलिया, सिंघाड़े जैसी कई वस्तुएं बनाते हैं। उनके अनुसार शहर तो दूर गांवों में भी लोग इस कला को भूल रहे हैं। इसलिए वे इसका अभियान चलाएंगे। शिक्षा संकाय की डीन प्रो.अमिता बाजपेयी की अगुवाई में अगले महीने से इसका कार्यक्रम भी तैयार किया गया है।
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