बात 1937 की है। बड़े साहित्यकार और शायर अली सरदार जाफरी, असरारुल हक ‘मजाज’ और सिब्ते हसन लखनऊ में रहा करते थे। अंग्रेजों के मुंह से टीपू सुल्तान के लिए निकलने वाली अपमानजनक टिप्पणियां इन तीनों को अपना अपमान लगती थीं। अंग्रेज टीपू सुल्तान से सख्त नफरत करते थे।
टीपू सुल्तान से अपनी नफरत का इजहार करने के लिए ज्यादातर अंग्रेजों ने कुत्तों का नाम टीपू रखना शुरू कर दिया। उनकी देखा-देखी हिंदुस्तानी भी बगैर सोचे-समझे अपने कुत्ते का नाम टीपू रख देते थे।
अली सरदार जाफरी ने लखनऊ की पांच रातें किताब में लिखा है, ‘मजाज ने फौरन कहा, ‘हम लोगों को एक कुत्ता पालना चाहिए और उसका नाम नेल्सन रख देना चाहिए ताकि अंग्रेजों को भी पता चले।’
इसी बीच सिब्ते हसन अचानक उठे और कहीं चले गए। चंद घंटों के बाद वापस आए तो उनकी गोद में एक निहायत खूबसूरत सफेद पिल्ला था। हम लोगों ने फौरन उसका नाम नेल्सन रख दिया, जिससे हम अपने आसपास रहने वाले अंग्रेजों से टीपू सुल्तान की तौहीन का बदला ले सकें।
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अली सरदार जाफरी
- फोटो : डेमो
नेल्सन बड़ा खूबसूरत था। हम लोग शाम को उसे लेकर टहलने निकलते और जहां भी अंग्रेजों को हम लोग देखते तो कुत्ते को ‘नेल्सन’ कहकर पुकारते। इससे हम लोगों को काफी संतोष मिलता।’