फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

अदम्य शौर्य दिखाकर कारगिल के हीरो बने मेजर रीतेश, 'मश्कोह सेवियर' के रूप में मिली पहचान

Wed, 25 Jul 2018 05:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 25 Jul 2018 05:53 PM IST
विज्ञापन
story of kargil shaheed ritesh sharma
मेजर रीतेश शर्मा - फोटो : amar ujala

कारगिल युद्ध में दो महीने तक दुश्मनों से मोर्चा लेने के बाद वीर जांबाजों ने दुश्मनों को खदेड़ दिया था। इस दौरान लद्दाख से लेकर हिमालय की दुर्गम व जोखिम भरी पहाड़ियों, ग्लेशियरों से भरी चोटियां को पार कर अदम्य शौर्य व साहस का परिचय देने वालों में इंदिरानगर निवासी मेजर रितेश शर्मा का नाम भी शामिल हैं।

story of kargil shaheed ritesh sharma
मेजर रीतेश शर्मा - फोटो : अमर उजाला
मेजर रीतेश उन जांबाज सिपाहियों में शामिल हैं, जिन्होंने कारगिल में विजय के बाद साथी जवानों की वीरता की कहानियां लोगों को सुनाईं। खुद अदम्य साहस का परिचय देते हुए कारगिल में दुश्मनों को खदेड़ा और जीत के नायक बने। लामार्टीनियर कॉलेज के छात्र रहे मेजर रीतेश शर्मा 9 दिसंबर, 1995 को सेना में भर्ती हुए। ड्यूटी के दौरान वह मई, 1999 में 15 दिनों की छुट्टी लेकर लखनऊ अपने घर आए थे।
story of kargil shaheed ritesh sharma
मेजर रीतेश शर्मा - फोटो : amar ujala
इसी दौरान कारगिल युद्ध की सूचना मिली कि जवानों की पेट्रोलिंग टुकड़ी की कोई जानकारी नहीं मिली। इससे पहले कि रेजीमेंट उन्हें बुलाती, वह बगैर बुलाए ही ड्यूटी पर पहुंच गए। चूंकि, जाट रेजीमेंट पहले ही कारगिल की ओर कूच कर चुकी थी, इसलिए मेजर रीतेश ने यूनिट के साथ दुश्मनों से मोर्चा लेते हुए चोटी पर तिरंगा फहरा दिया था। इसी क्रम में दो और चोटियों पर भी फतह हासिल की। पर, मश्कोह घाटी जीतते हुए वह घायल हो गए।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
story of kargil shaheed ritesh sharma
मेजर रीतेश शर्मा - फोटो : amar ujala
उन्हें बेस कैम्प में लाया गया और कमान कैप्टन अनुज नैयर को सौंप दी गई, जो कारगिल में शहीद हो गए। मश्कोह घाटी में तिरंगा फहराने के कारण ही 17 जाट रेजीमेंट को मश्कोह सेवियर का खिताब भी दिया गया। कारगिल के बाद 25 सितंबर, 1999 को कुपवाड़ा में आतंकी ऑपरेशन के दौरान मेजर शर्मा खाई में गिर गए थे, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था।

 
विज्ञापन
story of kargil shaheed ritesh sharma
मेजर रीतेश शर्मा - फोटो : amar ujala
शहीद की स्मृति में छात्रवृत्ति व मेडल
शहीद के पिता सत्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि बेटे की याद में एक स्कॉलरशिप व गोल्ड मेडल दिया जाता है। इंदिरानगर स्थित जनकल्याण आंख अस्पताल में टॉपर्स को शहीद मेजर रितेश शर्मा की याद में गोल्ड मेडल, जबकि रानी लक्ष्मीबाई स्कूल में एक हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। यह गोल्ड मेडल व छात्रवृत्ति हर साल प्रदान की जाती है।


 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed