{"_id":"5b9a29c3867a557ed5717132","slug":"story-of-ips-zaki-ahmad","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अलग ही थी आईपीएस जकी अहमद की बात, बेगुनाह को जेल से रिहा कराकर ही लिया दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलग ही थी आईपीएस जकी अहमद की बात, बेगुनाह को जेल से रिहा कराकर ही लिया दम
लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें जकी अहमद की अलग पहचान है। राजधानी में पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात रहे जकी अहमद को कड़क मिजाज और इंसाफ पसंद अफसर के रूप में याद किया जाता है।
2 of 5
डेमो
- फोटो : डेमो
वर्ष 2015 में लखनऊ जोन के पुलिस महानिरीक्षक बने जकी अहमद ने संगीन वारदात की तफ्तीश पर नजर रखने के साथ पकड़े गए आरोपियों से खुद पूछताछ करके फर्जी गुडवर्क के खेल पर अंकुश लगाया था। सीबीआई में तैनात रहे जकी अहमद की पड़ताल का भी अलग अंदाज था। राजधानी के चर्चित गौरी हत्याकांड में पुलिस ने हिमांशु प्रजापति और उसके दोस्त अनुज गौतम को गिरफ्तार करके सनसनीखेज वारदात का खुलासा किया। जकी अहमद ने खुद पूछताछ की। पता चला कि हिमांशु प्रजापति ने अपनी दोस्त गौरी की हत्या करके उसके शव के टुकड़े किए और उन्हें ठिकाने लगाया।
3 of 5
- फोटो : डेमो
एक व्यक्ति द्वारा वारदात अंजाम दिए जाने पर सवाल उठने की संभावना के चलते पुलिस ने हिमांशु के साथ उसके दोस्त अनुज को भी पकड़ लिया था। जकी अहमद ने फर्जीवाड़े पर नाराजगी जताई, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दोनों को जेल भिजवा दिया। जकी अहमद ने तफ्तीश की गहन समीक्षा के साथ अनुज के माता-पिता को ढांढस बंधाया और उसे जेल से रिहा कराकर माने। इसी तरह अनेक लोगों को फर्जी मामले में जेल जाने से बचाने के साथ अपराधियों पर सख्त कार्रवाई कराई।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
डेमो
लखनऊ जोन के पुलिस महानिरीक्षक बनने से चार साल पहले लंदन पुलिस की कार्यप्रणाली का जायजा लेकर लौटे जकी अहमद ने पूरे शहर को सीसीटीवी कैमरों से कवर कराने की पहल की। अपराध नियंत्रण के लिए सीसीटीवी कैमरे और हाईटेक सर्विलांस सिस्टम पर जोर देने के साथ नागरिकों को सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए प्रेरित किया।
विज्ञापन
5 of 5
डेमो
जकी अहमद ने राजधानी को चार क्षेत्र में विभाजित करके साप्ताहिक समीक्षा शुरू की। अपर पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी और थानेदारों को तलब करके प्रमुख वारदातों की तफ्तीश का ब्योरा जांचते थे। क्राइम ब्रांच को भी हर हफ्ते कसते थे। वारदातों के खुलासे के साथ अपराधियों की धरपकड़ का सिलसिला शुरू हुआ तो उन्होंने मुकदमों की पैरवी के लिए कसना शुरू किया।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।