राजधानी में लखनऊ में अब से 20 साल पहले केकेसी अभी जेएनपीजी कोएड कॉलेज नहीं था। प्रेम की कविताओं के दिनों में यहां हनुमान चालीसा का पाठ होता था। कॉलेज कोएड बने इसके लिए छात्र दो किलोमीटर दूर खम्मन पीर बाबा की दरगाह पर अर्जी लगाते थे। कॉलेज का ये किस्सा कवि पंकज प्रसून सुनाया तो कोई भी अपनी हंसी रोक नहीं पाया।
पंकज केकेसी पीजी कॉलेज में आयोजित लिट फेस्ट के अंतिम दिन कॉलेज के दिनों के किस्से साझा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तो यही समझ रही होगी कॉलेज में हमेशा से लड़के लड़कियां साथ में पढ़ रहे हैं, यह सही नहीं है। अभी मैं सीडीआरआई में काम करता हूं। उनके काम में और कविता में इतना ही अंतर है कि, वहां तन की दवा बनती है और कविता में मन की दवा बनती है। उनके साथ मंच प्रो बलवंत सिंह साझा कर रहे थे।
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किस्सा शेयर करते पंकज प्रसून।
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लिट फेस्ट की आगे की कड़ी में प्राचार्य प्रो. विनोद चंद्रा ने मशहूर फिल्म उमराव जान के निर्देशक मुजफ्फर अली संग चर्चा की। मुजफ्फर अली ने कहा कि लखनऊ उनकी रग रग में बसा है। लखनऊ और इसके लोगों की तरक्की ही उनका सपना है। उन्होंने बताया कि मैं प्रगतिवादी हूं और सिनेमा में आ रही डिजिटल तकनीक को तरक्की का कदम मानता हूं। मुझे भारत रत्न सत्यजीत प्रभावित किया इसलिए जैसा उन्होंने कलकत्ता के लिए मैं लखनऊ के लिए करना चाहता हूं।
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डॉक्टर हिमांशू बाजपेई
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दास्तांगो हिमांशु बाजपेई ने परिचर्चा में हिस्सा लेते हुए लखनऊ के लोगों की आराम फहमी पर कहा कि यहां की आहिस्ता मिजाजी शहर की पहचान है। उन्होंने जल्दी का काम शैतान का मुहावरे की उत्पत्ति के बारे में बताया, एक बार नवाब ने एक टेलर को अपने कपड़े तीन साल में भी सिल कर ना देने के लिए डांट दिया। तो उसकी पत्नी ने पूछा कि तुम्हें वह क्यों डांट रहा था।
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कार्यक्रम में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
इस पर टेलर ने कहा कि मैंने उसको तीन साल बाद बुलाया था इसके बाद भी कपड़े सिलकर ना दे सका। इसलिए उसने मुझे डाटा। तो पत्नी ने कहा कि इतना अर्जेंट ऑर्डर मत लिया करो। यह सुनकर पूरा पंडाल हंसी के ठहाकों से गूंज गया। उन्होंने लखनऊ शहर और मुहर्रम पर भी कई यकजहती के किस्से सुनाए। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर प्रो अनिल त्रिपाठी, प्रो. पायल गुप्ता, मंत्री प्रबंधक जीसी शुक्ला,विनायक शर्मा, माधव लखवानी सहित महाविद्यालय व बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में बोलते पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा।
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महापौर ने कॉलेज से हटवाईं भैंस
कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र में पहुंचें राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि उन दिनों वह शहर के महापौर थे। तत्कालीन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरिहरनाथ द्विवेदी ने उनको फोन करके कहा था कि कॉलेज के मैदान में पशुओं (भैंस) का कब्जा हो गया है और तबेला बन गया है। ऐसे में मैंने समस्या को गंभीरता से लिया और समाधान कराया। आज उसी जगह पर इतना भव्य कार्यक्रम हो रहा मैं इसे सोच नहीं पा रहा हूं। उनके साथ पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी उपस्थित रहे।