फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जमाने का दर्द समेटकर लोगों को खुशियां बांटते हमारे सेंटा, बोले- ये बच्चे ही मेरा जीवन

Tue, 24 Dec 2019 04:44 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 24 Dec 2019 04:44 PM IST
विज्ञापन
special story on christmas in lucknow
खुशियां बांटते हमारे सेंटा - फोटो : अमर उजाला

हम बचपन से सुनते आए हैं क्रिसमस पर सेंटा ढेरों उपहार लेकर आते हैं। उनसे जो भी मांगों वो ख्वाहिश पूरी होती है। सेंटा के आने का इंतजार पूरे साल हर किसी को रहता है, खासकर बच्चों की खुशियां तो पूछिए मत। सेंटा यानी पोटली में खुशियों का खजाना समेटे एक फरिश्ता। ऐसे फरिश्ते कहीं दूर देश से नहीं आते, बल्कि हमारे और आपके आसपास ही रहते हैं। जिनकी जिंदगी का मकसद ही है दूसरों के काम आना। दूसरों के चेहरे पर मुस्कुराहट देख उन्हें जमाने भर की खुशियां मिल जाती हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जो अपने इन प्रयासों को सुर्खियां नहीं बनाना चाहते, पर अमर उजाला के आग्रह पर इन्होंने खुद की कोशिशों को साझा किया। आइए आप भी जानें उनके जज्बे के बारे में...।


 
special story on christmas in lucknow
मदालसा बाजपेई और दिलीप कुमार - फोटो : अमर उजाला
सोच कर नहीं की जाती मदद
मदालसा व दिलीप बाजपेई

गोमतीनगर विस्तार में रहने वालीं मदालसा बाजपेई शिक्षिका थीं और पति दिलीप कुमार बैंक अधिकारी पद से रिटायर हैं। इनके बारे में इनसे जुड़े लोग बताते हैं कि बीते कई सालों से लगातार ये संपर्क में आने वाले लोगों की मदद करते आ रहे हैं। अपनी गाड़ी में चिप्स, टॉफी, बिस्कुट के पैकेट लेकर चलते हैं। राह चलते पैसे मांगने वालों को पैसा देने में इनका यकीन नहीं। निर्माणाधीन इमारतों में काम करने वाले मजदूरों को पढ़ाना उनकी आदत का हिस्सा है। इसके अलावा वे मजदूर महिलाओं को सिलाई के काम भी सिखा रही हैं। मदालसा बताती हैं कि पहले राजेन्द्रनगर में रहते थे, वहीं मोतीनगर अनाथालय था। आगे पढ़ने की इच्छुक बच्चियों की फीस देना व अनाथालय में बच्चों के लिए जरूरी सामान देते थे। उनकी इस आदत के बारे में पूछने पर कहती हैं कि यदि आप सच्ची खुशियां चाहते हैं तो लोगों को खुशियां बांटिए। दिलीप कुमार कहते हैं कि मदद सोच कर नहीं की जाती।
special story on christmas in lucknow
कृष्ण प्रताप व हेमलता शर्मा अपनी बेटी के साथ - फोटो : अमर उजाला

दो कदम आगे बढ़कर मदद करने का जज्बा
- कृष्ण प्रताप व हेमलता शर्मा अपनी बेटी के साथ

चाइल्ड लाइन में काउंसलर कृष्ण प्रताप शर्मा पिछले आठ साल से काउंसलर हैं। उनकी पत्नी हेमलता राजकीय बाल गृह शिशु में सहायिका हैं। बच्चों की मदद, उनकी देखभाल इन दोनों की नौकरी का हिस्सा है, लेकिन ये नौकरी को एक जिम्मेदारी की तरह निभा रहे हैं। खासकर कृष्ण प्रताप शर्मा की कोशिशें अपने आप में एक मिसाल हैं। उन्होंने खुद शिशु गृह में रहने वाली हेमलता से शादी करके नजीर पेश की है अब दोनों पति-पत्नी निस्वार्थ भाव से बच्चों की देखभाल करते हैं। सीडब्ल्यूसी सदस्य संगीता शर्मा कहती हैं कि कृष्ण प्रताप बच्चों को पढ़ना जानता है। वह सिर्फ काउंसलिंग तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी कोशिश होती है कि बच्चों को एक बेहतर भविष्य दिलवा सके, इसके लिए ड्यूटी के घंटे के बाद भी कभी अस्पताल, कभी पीड़ित बच्चे के घर तो कभी और कहीं देखे जा सकते हैं। कृष्ण प्रताप व हेमलता कहते हैं कि हमारी मुस्कान इन बच्चों की बदौलत है, हमारी बदौलत यदि इन्हें सुरक्षित भविष्य मिल सके तो इससे बढ़कर क्या है।

विज्ञापन
विज्ञापन
special story on christmas in lucknow
पवन कपूर - फोटो : अमर उजाला

जरूरतमंदों के नाम रहता है वीकेंडः पवन
खाते-बही में उलझे रहने वाले शख्स हैं सीए पवन कपूर। सीए होेने के नाते वे उन्हें कर्मों के हिसाब-किताब में भी पूरा यकीन है। कहते हैं कि कुछ लेकर आए नहीं, तो क्या लेकर जाएंगे। फिर जितना हो सके लोगों के काम आने की कोशिश करनी चाहिए। पिछले 8-10 सालों से उन्होंने अपना शनिवार जरूरतमंदों के नाम कर रखा है। कुर्सी रोड पर हर शनिवार को भंडारा होता है ताकि जिनके घर किन्हीं वजहों से चूल्हा नहीं जलता उन्हें कम से कम एक दिन तो भरपेट भोजन मिल सके। इसके अलावा सप्रू मार्ग स्थित मदर टेरेसा होम में रहने वाले असहायों को जरूरत की चीजें हर महीने भेजी जाती हैं। इसके अलावा निर्धन महिलाओं को स्टार्टअप शुरू करवाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने का श्रेय भी पवन व उनकी पत्नी अनुजा को जाता है। पवन कहते हैं कि यह पत्नी की ही सलाह थी कि हम कुछ महिलाओं की ऐसी मदद करें कि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

विज्ञापन
special story on christmas in lucknow
उपासना शर्मा विशेष बच्चों के साथ - फोटो : अमर उजाला

विशेष बच्चों को समर्पित उपासना
आशा ज्योति केंद्र के छात्रावास में रहने वाले विशेष बच्चों के लिए एक शख्स बहुत मायने रखती हैं। ये शख्स हैं केंद्र की प्रिंसिपल और वार्डन उपासना वर्मा। पिछले 16 साल से वे इनकी देखभाल कर रही हैं। इनकी सुबह और शाम इन्हीं के साथ होती है। निश्चित तौर पर चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इन्होंने अपना सारा जीवन इन बच्चों को समर्पित कर दिया हैं। क्लासेज भी लेती हैं। उपासना कहती हैं कि ये बच्चे ही मेरा जीवन है। लोगों को लगता है कि मैं इनके लिए कुछ खास करती हूं, जबकि सच तो ये है कि अपने घरेलू जीवन में लंबे समय तक शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद भी मुझे मुस्कुराना इन्हीं बच्चों के बीच आया और अब वही खुशियां मैं इनमें बांटने की कोशिश करती हूं। हां, विशेष बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है और यह चुनौतीपूर्ण है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed