बारिश का मौसम कीटाणु और जीवाणु पनपने का मौका देते हैं। इस मौसम में संक्रमण की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। पानी से होने वाले रोग बच्चों को ज्यादा चपेट में लेते हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी दिक्कत को कम कर सकती है।
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बारिश के मौसम में बच्चों का रखें खास ध्यान, ये भी जानिए, क्यों ज्यादा बीमार पड़ते हैं बच्चे
Tue, 06 Aug 2019 04:09 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 06 Aug 2019 04:09 PM IST
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वीके शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके शुक्ला का कहना है कि वायरल इंफेक्शन यूं तो हर उम्र के लोगों में आम बात है, लेकिन बच्चों में ज्यादा होता है। इससे बच्चों में सर्दी, जुकाम, खांसी, उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत हो जाती है। इसका असर कम से कम तीन दिन और अधिक से अधिक दो सप्ताह तक रह सकता है।
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वायरल होने पर चिंता की कोई बात नहीं, क्योंकि ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, लेकिन यह ध्यान देना होगा कि कहीं बैक्टीरियल इंफेक्शन तो नहीं। बार-बार वायरल की पुनरावृत्ति हो तो जरूर सतर्क हो जाएं और डॉक्टर से सलाह लें।
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ये भी जानिए, क्यों ज्यादा बीमार पड़ते हैं बच्चे
आम बोलचाल की भाषा में हम कहते हैं कि बच्चे जल्दी बीमार पड़ते हैं। दरअसल 12 साल तक की उम्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही होती है और शरीर से तालमेल बैठा रही होती है। इसीलिए बीमारियों का हमला बच्चे का शरीर झेल नहीं पाता। 12 साल की उम्र के बाद उसका शरीर रोगों से लड़ने के लायक बन जाता है।
आम बोलचाल की भाषा में हम कहते हैं कि बच्चे जल्दी बीमार पड़ते हैं। दरअसल 12 साल तक की उम्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही होती है और शरीर से तालमेल बैठा रही होती है। इसीलिए बीमारियों का हमला बच्चे का शरीर झेल नहीं पाता। 12 साल की उम्र के बाद उसका शरीर रोगों से लड़ने के लायक बन जाता है।
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ये लक्षण बीमारी के हैं
बच्चे के पूरे शरीर में दर्द होना, नाक से लगातार पानी बहना
गले में खराश, मिचली और उल्टी आना, त्वचा पर धब्बे
तीन हफ्तों से अधिक खांसी, ज्यादा ठंड लगना, हाथ-पैर में सूजन
शरीर का तापमान 100 से 103 डिग्री हो जाना।
बच्चे के पूरे शरीर में दर्द होना, नाक से लगातार पानी बहना
गले में खराश, मिचली और उल्टी आना, त्वचा पर धब्बे
तीन हफ्तों से अधिक खांसी, ज्यादा ठंड लगना, हाथ-पैर में सूजन
शरीर का तापमान 100 से 103 डिग्री हो जाना।