पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव के समर्थकों ने उन पर नई सियासी पारी शुरू करने का दबाव बढ़ा दिया है। वे चाहते हैं कि मौजूदा घटनाक्रम पर वह चुप्पी तोड़ें और अपने अपमान के खिलाफ मुखर हों। इसके लिए नया दल नहीं तो कोई फ्रंट बनाकर लड़ाई की शुरुआत की जा सकती है। हो सकता है कि 12 अक्तूबर को डॉ. राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि से पहले वह कोई अहम फैसला कर लें। दो दिन से शिवपाल अपने समर्थकों से मिल रहे हैं।
इटावा और मैनपुरी के कार्यकर्ता व नेता उनसे खासतौर से मिले हैं। शिवपाल समर्थकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पांच अक्तूबर को सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुलायम सिंह को फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाता है या नहीं। यदि नेताजी को फिर से पार्टी की बागडोर नहीं सौंपी गई तो शिवपाल कोई भी फैसला लेने के लिए खुद को आजाद समझेंगे।
गौरतलब है कि पिछले दिनों लोहिया ट्रस्ट में हुई प्रेस कांफ्रेंस के बारे में ये कयास लगाए जा रहे थे कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव नई पार्टी बनाने की घोषणा कर सकते हैं लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि नई पार्टी नहीं बनाएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि वो न तो अखिलेश के साथ हैं और न शिवपाल के साथ बल्कि सपा के साथ हैं। इससे मुलायम की रहनुमाई में नई पार्टी के गठन की उम्मीद संजो रहे शिवपाल को करारा झटका लगा।
मुलायम ने अखिलेश के बारे में कहा था कि अखिलेश यादव पुत्र हैं, इस नाते मेरा आशीर्वाद उनके साथ है लेकिन उनके कई फैसलों से सहमत नहीं हूं। यह पूछने पर कि कौन से फैसलों से सहमत नहीं है तो कहा, यह बाद में बताऊंगा। उन्होंने अखिलेश को भी नसीहत दी कि जो बाप का नहीं हो सकता, वह किसका होगा, उस पर कौन विश्वास करेगा?
उन्होंने पार्टी में उठापटक और नए दल के गठन की अटकलों पर यह अपील करके विराम लगा दिया कि समाजवादी विचारधारा के लोग गरीब, मजदूर, किसान, नौजवान, महिलाओं और छात्रों को सपा से जोड़ें। सपा पूरे प्रदेश में, गली, मुहल्ले और गांव-शहरों में है। सपा में नेतृत्व के सवाल पर कहा कि नेतृत्व हम ही कर रहे हैं।
अखिलेश के वादा न निभाने पर थे नाराज
मुलायम अखिलेश के वादा न निभाने पर नाराज थे। वो बोले, अखिलेश ने कहा था, तीन महीने के लिए अध्यक्ष हूं, इसके बाद नहीं रहूंगा। नेता जबान का पक्का और वादा निभाने वाला होना चाहिए। बाप को धोखा देगा तो कौन विश्वास करेगा। देश के सबसे बड़े नेता (पीएम नरेंद्र मोदी) ने कन्नौज में कहा कि जो बाप का नहीं हो सकता, वह किसका होगा। इसके बाद क्या बचता है।